इन अस्पतालों पर चिकित्सक भी मौजूद नहीं है। चिकित्सालयों पर तैनात फार्मासिस्ट ही किसी तरह संचालन कर रहे हैं। इससे क्षेत्र के लोगों को होम्यौपैथ चिकित्सा सुविधा का लाभ मिल नहीं पा रहा है।
मालूम हो कि तहसील क्षेत्र के अढ़नपुर, मिझौड़ा व हीड़ी पकड़िया आदि स्थानों पर लगभग एक दशक पूर्व किराए के भवनों में होम्योपैथिक चिकित्सालय की स्थापना की गई थी। एक दशक का समय बीत गया, लेकिन अब तक इन अस्पतालों को अपना भवन नसीब नहीं हो सका।
अस्पतालों की बदहाली का आलम यह है कि मौजूदा समय में इन अस्पतालों में चिकित्सक तक नहीं हैं। यहां तैनात फार्मासिस्ट ही इसका संचालन कर रहे हैं। अढ़नपुर चिकित्सालय से जुड़े रामरूप यादव कहते हैं कि जब इस होम्योपैथ चिकित्सालय की स्थापना हुई थी तो उस समय टेमा, मदारभारी, अढ़नपुर, इटवा, काही,समरसिंहपुर, खजुरी व तेजापुर आदि गांवों के लोग खुश हुए थे।
चलन कम होने के बावजूद आज भी लोगों के अंदर होम्यापैथ चिकित्सा पद्घति पर काफी विश्वास है, परन्तु सुविधाएं न मिल पाने के चलते लोगों को मजबूर होकर इससे मुंह मोड़ना पड़ा है। मिझौड़ा में स्थापित चिकित्सालय से प्रताबीपुर, भगवानपट्टी व मिझौड़ा सहित बसंतपुर के अलावा आधा दर्जन से अधिक गांव के लोग सस्ते दर पर बेहतर इलाज की उम्मीद संजोए थे।
घनेपुर, महरुआ, रामबाबा व अवरडीहा के लोग हीड़ी पकड़िया अस्पताल से अच्छे इलाज की बाट जोह रहे हैं। लोगों के अनुसार स्थापना के बाद के कुछ वर्षों को छोड़ दिया जाए तो यह होम्योपैथिक अस्पताल कभी भी लोगों को सुचारु व्यवस्था नहीं दे पाए। उधर जिला होम्योपैैथ चिकित्साधिकारी ने बताया कि अस्पतालों में सुचारु इलाज चल रहा है। आने वाले दिनों में व्यवस्था को और प्रभावी बनाया जाएगा।