अंबेडकरनगर। जिले के नौ राजकीय कृषि रक्षा इकाई व राजकीय बीज भंडार में शासन से कीटनाशक की खेप पहुंच गई है। यह किसानों को कृषि भूमि और फसल के रकबा के आधार पर दिया जाएगा। कृषि विभाग की टीम किसानों को रसायन के उपयोग की विधि भी बताएगी।
शहर से लेकर गांव तक जगह-जगह कीटनाशकों की दुकानें खुली हुई हैं, जहां पर किसानों को महंगा रसायन खरीदना पड़ता है। आलम यह है कि किसान फसल के उपचार को एक रसायन लेने जाता है, लेकिन दुकानदार उसे दो-तीन और थमा देते हैं। तर्क दिया जाता है कि एक रसायन कीटनाशक खत्म करेगा, जबकि अन्य फसलों की पैदावार में वृद्धि करेंगे। इससे किसान अंधाधुंध कीटनाशकों का फसलों पर प्रयोग करते हैं। अधिक कीटनाशकों के प्रयोग से खेती का खर्च बढ़ रहा है, जबकि उत्पाद की गुणवत्ता घट रही है।
अब किसानों को कृषि विभाग जनपद में सस्ते कीटनाशक उपलब्ध कराएगा। जो कीटनाशक बाजार में एक हजार या इससे अधिक धनराशि के मिलते हैं, उनकी कीमत कृषि रक्षा इकाइयों पर 100 रुपये से कम रहेगी। मसलन, जन औषधि केंद्रों की तर्ज पर सस्ते कीटनाशक मिलेंगे। इनमें साल्ट महंगे कीटनाशकों वाला ही रहेगा, जो फसल पर लगने वाले कीटों का खात्मा करेगा। जिला कृषि अधिकारी पीयूष राय ने बताया की कीटनाशक की खेप सभी ब्लॉकों के कृषि रक्षा इकाइयों पर भेज दी गई है। किसान यहां से प्राप्त कर सकते हैं।
पहुंची इन रसायन की खेप
राजकीय कृषि रक्षा इकाइयों पर कीटनाशक पहुंच गए हैं। सस्ते होने के साथ ही इन पर 50 से 75 प्रतिशत तक छूट भी मिलेगी। राजकीय कृषि रक्षा इकाई व राजकीय बीज भंडार से किसान ट्राइकोड्रमा (फफूंदीनाशी), ब्यूवेरिया बेसियाना (जैविक कीटनाशक), डेल्टामेथरीन 25 प्रतिशत, काबेंडाजिम 50 प्रतिशत, सल्फर 80 प्रतिशत, कलोरोपायरीफास 20 प्रतिशत, मॅकोजेब 75 प्रतिशत, प्रॉपिकोनाजोल 25 प्रतिशत, मेट्रिब्युजिन 70 प्रतिशत, क्लोरोपायरीफास 10 प्रतिशत, फेनवलरेट 0.4 प्रतिशत, फिप्रोनिल 0.3 प्रतिशत, लैम्बडासायहैलोथ्रीन 5 प्रतिशत, थियोफिनेट मैथइल 70 प्रतिशत, थायामैथक्साम 25 प्रतिशत, जिबरेलिक एसिड 0.001 प्रतिशत, जिंक फासफाइड 80 प्रतिशत और क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 18.5 प्रतिशत (कोरेजन) प्राप्त कर सकते हैं।