अंबेडकरनगर। आग उगलती धूप की किरणें और गर्म पछुआ हवा के थपेड़ों ने लोगों को बेहाल कर दिया। सोमवार को दिन धधकता रहा और रात में उमस भरी गर्मी की दोहरी मार से लोग बिलबिला उठे। सोमवार को अधिकतम तापमान 42 डिग्री और न्यूनतम 31 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।
सोमवार को दिन की शुरुआत तो बदली के साथ हुई, लेकिन उमस के कारण सुबह सात बजे ही तापमान 34 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। दिन चढ़ने के साथ ही धूप ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए। दोपहर एक बजने तक पारा 42 डिग्री पर जाकर ठहर गया। ज्येष्ठ माह में यह पहला मौका था जब तापमान 42 डिग्री पर पहुंचा। इससे पहले नौतपा में भी तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक नहीं पहुंचा था।
भीषण गर्मी का असर शहर की सड़कों पर देखने को मिला। दिन में तहसील तिराहे से अयोध्या, टांडा, शहजादपुर जाने वाले प्रमुख मार्गों पर लोगों की भीड़ औसत से काफी कम रही। बाइक-स्कूटी सवार व पैदल चल रहे लोगों को गर्म हवा के थपेड़ों ने इस कदर बेहाल किया कि बिना अंगौछे व स्टोल से चेहरा ढककर चलना मुश्किल हो गया। ऑटो, ई रिक्शा का इंतजार करने वाले लोग तहसील तिराहे के पास लगीं दुकानों व बस स्टॉप की शरण लेते नजर आए। अयोध्या मार्ग पर लगने वालीं तमाम सब्जी की दुकानें शाम को ही लगीं।
बढ़े उल्टी-दस्त के मरीज
पिछले पांच दिनों से गर्मी में इजाफा होने के साथ जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ गई है। ओपीडी से लेकर इमरजेंसी तक पेट संबंधी बीमारी के साथ उल्टी-दस्त व सिरदर्द की समस्या वाले मरीज रोज पहुंच रहे हैं। सोमवार सुबह से आधा दर्जन से अधिक उल्टी व दस्त से पीड़ित मरीज अस्पताल में भर्ती हुए। हुसैनपुर बिपनहा के रहने वरले आदित्य, डडया इमलिहा की रहने वाली अंशिका, गोहिला के रहने वाले अमरजीत, बरहा नियामत चक की रहने वाली पूजा को उल्टी-दस्त के बाद जिला अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती कर इलाज किया जा रहा है।
फिजिशियन डॉ. योगेश वर्मा ने बताया कि इस मौसम में अधिक देर तक धूप में जाने से बचना चाहिए। पानी व ओआरएस का नियमित सेवन मौसम जनित बीमारियों से बचाने में कारगर है।
धान की नर्सरी में सूख जा रहा पानी
मौसम की बेरुखी का असर इस समय धान की नर्सरी पर पड़ रहा है। नर्सरी में पानी दो-दिन में सूख जा रहा है। ऐसे में बार-बार पानी लगाने के लिए किसानों को मशक्कत करनी पड़ रही है। वहीं, गन्ने के खेतों में नमी समाप्त होने के कारण फसल ऐंठ जा रही है। सूखे से बचाने के लिए किसानों को हर 10 दिन में पानी लगाना पड़ रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र पांती के अध्यक्ष डॉ. रामजीत बताते हैं कि चढ़ते तापमान के कारण हर फसल को नुकसान हो रहा है। खेतों में पर्याप्त नमी बनाए रखकर ही फसलों को बचाया जा सकता है।