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Ambedkar Nagar News: शक्ति से अधिक महत्वपूर्ण है संयम

Sun, 22 Feb 2026 10:59 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
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भीटी। क्षेत्र के नरायनपुर घाट स्थित एक निजी अस्पताल परिसर में श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन रविवार को भक्त प्रह्लाद चरित्र का वर्णन किया गया। प्रवाचक आचार्य औचित्यानंद राघव दास ने इसे बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक बताया।
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उन्होंने बताया कि हिरण्यकश्यप अपनी शक्ति और सामर्थ्य के अहंकार में स्वयं को ईश्वर मान बैठा था। वह चाहता था कि सभी उसकी पूजा करें। इसके विपरीत उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का अनन्य भक्त था। हिरण्यकश्यप ने पुत्र को भक्ति मार्ग से हटाने के अनेक प्रयास किए, लेकिन प्रह्लाद अडिग रहे। हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को मारने के लिए कई उपाय किए।
उन्हें पहाड़ से गिराया गया, हाथियों से कुचलवाने का प्रयास हुआ और विषैले सर्पों के बीच डाला गया, लेकिन हर बार वे सुरक्षित रहे। अंततः हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका को अग्नि में बैठने का आदेश दिया।
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