अंबेडकरनगर। जिले में डग्गामार वाहनों की बेलगाम रफ्तार ने रोडवेज को पीछे छोड़ दिया है। कम सवारियों और डग्गामार वाहनों की मार के चलते रोडवेज को लोड फैक्टर पूरा नहीं मिल पा रहा, जिससे निगम को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान झेलना पड़ रहा है। त्योहारों की गैर-मौजूदगी ने भी इस संकट को और गहरा कर दिया है।
अकबरपुर डिपो के पास 95 बसों का बेड़ा है, लेकिन रोज़ाना महज 42 बसें ही सड़कों पर उतर पा रही हैं। कारणसवारियों की भारी कमी। डिपो अधिकारियों के अनुसार, डग्गामार वाहन और प्राइवेट बसें प्रमुख चौराहों व स्टेशनों के आसपास यात्रियों को कम किराए का लालच देकर लुभा लेती हैं। कुछ प्राइवेट वाहन चालक तो रोडवेज बस स्टेशन तक पहुंचकर वहां खड़े यात्रियों को जल्दी पहुंचाने का झांसा देकर अपनी ओर खींच लेते हैं। यात्रियों के बहकावे में आने से रोडवेज की बसें खाली रह जाती हैं। विरोध करने पर कर्मचारियों और प्राइवेट चालकों में बहस की स्थिति भी बन जाती है। डग्गामार वाहनों पर अंकुश लगाने के लिए परिवहन विभाग की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही। रोडवेज प्रशासन ने इस पर चिंता जताते हुए कहा है कि विभागीय उदासीनता के कारण निगम को भारी राजस्व घाटा झेलना पड़ रहा है।
परीक्षा सीजन में दिखा असर, फिर से हालात पुराने
6 और 7 सितंबर को आयोजित प्रारंभिक अहर्ता परीक्षा के दौरान यात्रियों की संख्या में जबरदस्त इजाफा हुआ। इस दौरान रोडवेज को तीन दिन में 62% लोड फैक्टर मिला, जिससे अच्छी आय हुई। एआरएम हरिओम श्रीवास्तव ने बताया कि परीक्षा जैसे आयोजनों से यात्री बढ़ते हैं, लेकिन सामान्य दिनों में स्थिति फिर से खराब हो जाती है। उन्होंने कहा कि डग्गामार वाहनों पर कार्रवाई के लिए परिवहन विभाग से बातचीत की जाएगी।