राजेसुल्तानपुर। सरयू नदी के कम्हरिया घाट पर पीपा पुल निर्माण अधर में लटक गया है। हर साल नवंबर में ही शुरू हो जाने वाला यह पुल अब तक इस बार आवागमन के लिए अब तक तैयार नहीं हुआ है। दरअसल, नदी की धारा खिसक जाने से इस बार चौड़ाई बढ़ गई है इसलिए पुल बनाने के लिए 15 पीपे कम पड़ गए हैं, जिनका इंतजाम नहीं किया जा पा रहा है। नतीजा यह है कि इस पुल से हर दिन गुजरने वाले करीब 10 हजार लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लोगों का नाव का सहारा लेकर नदी पार करनी पड़ रही है। वहीं, बाइक सवार व चार पहिया वाहन चालक लंबी दूरी तय कर बिड़हर घाट से जाने को मजबूर हैं।
आलापुर तहसील क्षेत्र में सरयू नदी के कम्हरिया घाट पर हर साल पीपा पुल का निर्माण होता है। यह पुल बन जाने से अंबेडकरनगर से गोरखपुर की दूरी सिमट जाती है। नदी के दोनों छोरों पर स्थित गांवों में बसे तमाम लोग अपनी जरूरतों के लिए इस पुल का इस्तेमाल करते हैं, जबकि वाहन चालकों द्वारा भी पुल बनते ही इस तरफ रुख कर लिया जाता है। हर साल 15 अक्तूबर को पुल का निर्माण शुरू हो जाता है। 15 नवंबर को आवागमन के लिए आम तौर पर पुल को खोल दिया जाता था।
हालांकि इस बार अब तक ऐसा नहीं हो पाया है। कारण यह कि पुल निर्माण के लिए 15 पीपे कम पड़ गए हैं। यह स्थिति इसलिए पैदा हुई क्योंकि लोक निर्माण विभाग के अनुसार नदी की चौड़ाई इस बार बढ़ गई है। ऐसे में बीते साल जहां यह पुल 65 पीपे लगने के बाद ही तैयार हो गया था। वहीं इस बार 70 पीपे लगाने के बाद भी पुल का निर्माण पूरा नहीं हो पाया। अब भी करीब 15 पीपों की जरूरत बनी हुई है।
लोक निर्माण विभाग अतिरिक्त पीपों का प्रबंध कर रहा है। तीन चौथाई पुल का निर्माण पूरा कर लेने के बाद विभाग ने पुल पर वाहनों को जाने से रोकने के लिए बैरीकेडिंग कर दी है। ऐसा इसलिए, जिससे रात या शाम के समय कोई हादसा न होने पाए। इस बीच दिसंबर माह का पहला पखवारा बीतने के बाद भी पुल से आवागमन शुरू न हो पाने के चलते हर दिन करीब दस हजार यात्रियों की उम्मीदों को चोट पहुंच रही है। कम दूरी वाले बाइक सवार व नदी के दूसरे छोर पर स्थित गांवों के लोग कम्हरिया घाट पर गंतव्य तक पहुंचने के लिए नाव का सहारा लेने को मजबूर हैं। नावों पर बड़ी तादाद में बाइक व यात्री भी मौजूद रहते हैं, जिससे हादसे का खतरा बना रहता है।
कम्हरिया घाट पर पीपा पुल निर्माण न होने से गोरखपुर जाने वाले यात्रियों को बिड़हर घाट होकर जाने को मजबूर होना पड़ रहा है। कम्हरिया घाट से होकर जहां यात्री सीधे गोरखपुर पहुंच सकते हैं, वहीं बिड़हर घाट पुल से जाने पर उन्हें खलीलाबाद होकर गोरखपुर पहुंचना पड़ता है। इससे लगभग 65 से 70 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही।
स्थानीय रामकुमार, जितेंद्र व शरद ने कहा कि पीपा पुल शुरू होने में एक माह का विलंब हो गया है। यह स्थिति ठीक नहीं है। गोरखपुर जाने वाले नागरिकों को बिड़हर घाट पुल तक की लंबी दौड़ लगानी पड़ रही। पुल शुरू हो जाने की उम्मीद में कम्हरिया घाट पर पहुंचे बेवाना के पंकज वर्मा व सुरेश चतुर्वेदी ने कहा कि यहां पुल ठप रहने से निराशा लगी है। गोरखपुर जाने के लिए अब बिड़हर घाट का रूख करना पड़ेगा।
नदी की चौड़ाई अधिक हो जाने से पीपे कम पड़ गए हैं। पंद्रह पीपे और चाहिए। इनका प्रबंध किया जा रहा है। जल्द ही निर्माण पूरा कर लिया जाएगा।
- गौरव श्रीवास्तव, अवर अभियंता, लोक निर्माण विभाग