जलालपुर। मालीपुर के रसूलपुर बाकरगंज में शनिवार सुबह कर्बला की याद और अजादारी की परंपरा से जुड़ा 29वां वार्षिक अमारी जुलूस निकाला गया। ऊंटों पर सजीं अमारियां, बनी हाशिम के 18 शबीह व ताबूत, जुलजनाह और अलम जुलूस में शामिल रहे।
अंजुमन इमामिया के तत्वावधान में निकले जुलूस से पहले मजलिस हुई। मजलिस को मौलाना सैयद अली मंसब रिजवी ने संबोधित किया। उन्होंने इमाम हुसैन की कुर्बानी का उल्लेख करते हुए बेगुनाह का खून न बहाने और किए गए वादे को पूरा करने की बात कही। उन्होंने शाम के कैदखाने में इमाम हुसैन की चार वर्षीय बेटी हजरत सकीना की शहादत और अहले हरम की कर्बला वापसी का प्रसंग भी सुनाया। इसके बाद अजादारों ने मातम किया।
जुलूस की निकाबत मौलाना सैयद शारिब अब्बास ने की। मौलाना सैयद आदिल अब्बास, मौलाना सैयद नूरुल हसन, मौलाना सैयद साबिर रजा और मौलाना सैयद बाकिर सज्जाद जैदी ने तकरीरों के जरिये कर्बला से जुड़े प्रसंगों को सामने रखा। जुलूस में मुबारकपुर की अंजुमन गुलशन हैदरी, मुस्तफाबाद की अंजुमन जाफरिया रजिस्टर्ड, जाफराबाद जलालपुर की अंजुमन हुसैनिया, जलालपुर की अंजुमन रौनक-ए-अजा, उस्मानपुर की अंजुमन जफरुल ईमान और नगपुर की अंजुमन हैदरिया ने हिस्सा लिया।
अंजुमनों ने नौहा और मातम पेश किया। कार्यक्रम का संचालन अरशी वास्ती और मौलाना हुसैन अब्बास ने किया। अंजुमन के संयोजक डॉ. इमरान हैदर ने जुलूस में शामिल जायरीन और मातमी अंजुमनों का आभार जताया। इस दौरान दिलबर, जायर हुसैन मख्खू, नजर अब्बास, रजी अब्बास, मोहम्मद कासिम, कायम अब्बास, रईस अहमद, मोहम्मद अब्बास, एहतेशाम हुसैन, अब्बास रजा, जहीर हैदर व अन्य उपस्थित रहे।