अंबेडकरनगर। जिला अस्पताल में कई तरह के ऑपरेशन ठप पड़ गए हैं। यहां ओटी कक्ष का आधुनिकीकरण चल रहा है। इसके चलते ही यहां ऑपरेशन के लिए पहुंच रहे मरीजों को झटका लग रहा है। उन्हें राजकीय मेडिकल कॉलेज सद्दरपुर रेफर किया जा रहा है।
मरीजों का कहना है कि यहीं पर वैकल्पिक प्रबंध करना चाहिए था, जिससे अनायास की मुश्किलों से वे सब बच सकते थे। मरीजों का ऑपरेशन बेहतर ढंग से करने के लिए जिला अस्पताल स्थित ऑपरेशन कक्ष को अत्याधुनिक बनाया जा रहा है। लगभग एक करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक मशीन व अन्य उपकरण की व्यवस्था किए जाने का काम चल रहा है। इसके अलावा ओटी लाइट भी बदली जा रही है।
आपरेशन कक्ष का कायाकल्प होने का प्रतिकूल प्रभाव हार्निया, पथरी, बच्चेदानी समेत कई अन्य प्रकार के ऑपरेशन पर पड़ रहा है। यह सभी ऑपरेशन यहां पूरी तरह से ठप है।
मालूम हो कि जिला अस्पताल में प्रतिदिन औसतन 1100 मरीजों की ओपीडी होती है। इसके साथ ही प्रतिदिन औसतन पांच अलग अलग प्रकार के ऑपरेशन होते हैं। ओटी में काम चलने के चलते संबंधित ऑपरेशन ठप हैं।
इसके चलते संबंधित मरीजों को राजकीय मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया जाता है। इससे मरीजों व उनके तीमारदारों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। हालांकि आर्थो से जुड़े ऑपरेशन अलग ओटी में हो रहे हैं।
वैकल्पिक व्यवस्था की जाए
हिथुरी निवासी दिनेश ने कहा कि रिश्तेदार का हार्निया का ऑपरेशन होना था। जिला अस्पताल में जानकारी हासिल की गई, तो पता चला कि फिलहाल ऑपरेशन नहीं हो रहा है। ऐसे में राजकीय मेडिकल कॉलेज में ऑपरेशन कराना पड़ा। मरुई ताजपुर निवासी आफताब ने कहा कि जलालपुर निवासी मित्र परवेज की बहन की बच्चेदानी का ऑपरेशन होना था। पता किया गया, तो जानकारी दी गई कि अभी ओटी में काम चल रहा है। इसलिए राजकीय मेडिकल कॉलेज तक की दौड़ लगानी पड़ी। कहा कि मरीजों के हित को देखते हुए जिला अस्पताल में वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिए।
संक्रमण के चलते नहीं हो रहे बड़े ऑपरेशन
ऑपरेशन कक्ष का कायाकल्प हो रहा है। उसे अत्याधुनिक मशीनों व अन्य उपकरणों से लैस किया जा रहा है। इसके चलते बड़े ऑपरेशन प्रभावित है। वैकल्पिक व्यवस्था है। लेकिन चिकित्सकों का कहना है कि विधिवत ओटी न होने पर संक्रमण का खतरा हो सकता है। इसलिए ऐसे ऑपरेशन बेहोश करने की जरूरत है, वह नहीं हो रहे हैं।
डॉ. ओमप्रकाश, सीएमएस