जिले में छोटे सिलेंडरों की रीफिलिंग का गोरखधंधा तेजी से पनप रहा है। महंगा होने के बावजूद आसानी से उपलब्धता के चलते आमतौर पर लोग इनका खूब प्रयोग कर रहे हैं। इसमें कनेक्शन लेने तक का झंझट नहीं रहता है। सुविधा के इसी चक्कर में पड़कर कई बार लोग मुश्किलों को गले लगा लेते हैं।
जिला मुख्यालय से लेकर ग्रामीण क्षेत्र की बाजारों में फैले इस धंधे को लेकर प्रशासन मौन है। गौरतलब है कि बीते दिन बाराबंकी जिले के देवा कोतवाली क्षेत्र में वैवाहिक आयोजन के दौरान खाना बनाते समय पांच किलो का गैस सिलेंडर फटने से आठ लोगों की मौत हो गई थी।
इस हादसे ने छोटे सिलेंडरों को लेकर बरती जा रही लापरवाही व मनमानी का मामला एक बार फिर उजागर कर दिया है। दरअसल छोटे सिलेंडरों की रीफिलिंग का काला कारोबार तेजी से सभी जिलों में पांव पसार चुका है। अंबेडकरनगर में भी बेखौफ ऐसे सिलेंडरों की अवैध ढंग से बिक्री व रीफिलिंग हो रही है।
जिला मुख्यालय पर ही अवैध ढंग से रीफिलिंग की एक दर्जन से अधिक दुकानें खुली हुई हैं। हालांकि अधिकृत कंपनियों द्वारा पांच किलो का जो सिलेंडर उपलब्ध है, वह सस्ता है लेकिन कनेक्शन लेने के झंझटों में पड़ने की बजाए दुकान पर जाकर झटपट ऐसे सिलेंडर खरीद लेना लोग ज्यादा आसान समझते हैं।
भारत पेट्रोलियम से जुड़े कपूर गैस एजेंसी के मालिक राजन कपूर बताते हैं कि पांच किलो का सिलेंडर 215 रुपये में उनके यहां उपलब्ध है। इसमें 56 रुपए 50 पैसे की सब्सिडी भी शामिल है जो खाते में जाती है। जाहिर तौर पर ऐसे में उपभोक्ताओं को वैध ढंग से यह सिलेंडर लेने पर लगभग 30 रुपये प्रति किलो की दर से गैस उपलब्ध हो जाती है।
उधर, आम दुकानों पर यही सिलेंडर लेने पर 80 से 100 रुपये प्रति किलो तक दाम वसूला जाता है। उस पर भी इन छोटे सिलेंडरों में तीन से चार किलो गैस ही उपलब्ध हो पाती है। सिलेंडर की गुणवत्ता को लेकर भी कई तरह की मुश्किलें सामने आती हैं।
ऐसा इसलिए क्योंकि रीफिलिंग का कार्य मैनुअली व अप्रशिक्षित लोगों द्वारा किया जाता है। इसी के चलते ऐसे सिलेंडर मंहगे तो पड़ते ही हैं, उनसे खतरा भी कहीं अधिक बना रहता है। इसके बावजूद ग्राहकों का पूरा जोर छोटे सिलेंडरों को लेकर अवैध ढंग से खुली दुकानों पर ही केंद्रित रहता है।