टीस भी दिखाई पड़ी कि अगर इसे पहले ही घोषित किया गया होता तो उन्हें इसका व्यापक लाभ मिल सकता था। उनका कहना था कि बच्चों की पढ़ाई से लेकर परिवार की दवाई तक में जिन मुश्किलों का सामना उन्हें करना पड़ा, उससे काफी हद तक निजात मिल जाती।
वन रैंक वन पेंशन के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रहे पूर्व सैनिकों के लिए केंद्र सरकार ने जो घोषणा की है, उससे जिले के लगभग एक हजार पूर्व सैनिकों को सीधे तौर पर लाभ मिलेगा। अलग-अलग पदों के हिसाब से पूर्व सैनिकों को हजारों रुपये प्रतिमाह का अतिरिक्त लाभ मिलेगा।
पूर्व सैनिक प्रकोष्ठ संस्थान के जिला सचिव सुरेन्द्र प्रताप सिंह बताते हैं कि जिले में लगभग एक हजार जो पूर्व सैनिक हैं, उन्हें सरकार की घोषणा से लाभ मिलना तय है। यह लाभ न्यूनतम ढाई हजार से लेकर 10 हजार के ऊपर तक प्रतिमाह होगा।
सुरेन्द, नायब पद से 31 अक्तूबर 2000 को सेवानिवृत्त हुए थे, तब उन्हें 3880 रुपये पेंशन मिलती थी। यह बढ़कर अब 11 हजार 17 रुपये है। इस योजना के लागू होने से उन्हें भी करीब पांच हजार रुपये प्रतिमाह का लाभ मिलने की उम्मीद है।
आलापुर तहसील के अन्नापुर निवासी कुशलपाल सिंह आर्मी में नायक पद से 8 जून 1973 को सेवानिवृत्त हुए थे। उस समय उन्हें 43 रुपये की जो पेंशन मिलती थी, वह अब बढ़कर 11 हजार 300 रुपये हो गई है। बोले, यह योजना पहले लागू हुई होती तो वे अपने दोनों पुत्रों को बेहतर पढ़ाई करा सकते थे।
जलालपुर तहसील के अरई निवासी राजमणि मौर्य 1 अप्रैल 2005 को हवलदार क्लर्क के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। बिहार रेजीमेंट में तैनाती के बाद सेवानिवृत्त होने पर उन्हें 48 सौ रुपये की जो पेंशन मिलती थी, वह अब 11 हजार 546 रुपये तक पहुंची है।
पत्नी व पिता की बीमारी के कारण मामूली पेंशन से काम नहीं चल पाता। वे स्टेट बैंक में गार्ड के तौर पर नौकरी कर रहे हैं। बोले कि पूर्व सैनिकों को उनका हक बहुत देर से मिल रहा है। यह पहले ही हो गया होता तो हजारों परिवारों को तमाम प्रकार की मुसीबतों से न जूझना पड़ता।