परिषदीय स्कूलों में छात्र-छात्राओं का डाटा बेस तैयार करने के मामले में शिक्षा विभाग जिले में फिसड्डी साबित हो रहा है। आधार लिंक योजना से परिषदीय स्कूलों में अभी एक भी विद्यार्थी को जोड़ा नहीं जा सका है। शिक्षा के स्तर में सुधार करने व छात्र-छात्राओं को गुणवत्तापरक शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए शासन ने पांच से 18 वर्ष तक के बच्चों का आधार लिंक किए जाने की योजना की शुरुआत की थी।
योजना के अनुसार न छात्र-छात्राओं का आधार कार्ड बनवाकर डाटा लिंक कराया जाएगा बल्कि जिनका आधार कार्ड नहीं बन सका है, उन्हें विकल्प के रूप में यूनिक आइडी दिए जाने का प्रावधान है। योजना को लेकर जिले में संबंधित अधिकारियों द्वारा गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिले में परिषदीय विद्यालयों में पढ़ रहे छात्र-छात्राओं के आधार लिंक का कार्य ही अब तक जिले में नहीं शुरू हो सका है। उन्हें विकल्प के रूप में यूनिक आइडी भी नहीं दिया जा सका है।
सिर्फ शिक्षकों का ब्यौरा ही हो सका जमा
जिले में 1 हजार 352 प्राथमिक व 520 उच्च प्राथमिक विद्यालय है। इनमें 1 लाख 70 हजार विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं। इन्हें गुणवत्तापरक शिक्षा देने के लिए लगभग छह हजार शिक्षकों की तैनाती है। शासन के तमाम दिशा निर्देशों के बाद भी अब तक इन शिक्षकों का ही आधार व ईमेल आईडी का ब्योरा बीएसए कार्यालय में जमा हो सका है।
माध्यमिक स्कूलों में 50 फीसदी स्टूडेंट्स के पास नहीं आधार कार्ड
जिले में माध्यमिक स्तर तक के सरकारी व मान्यता प्राप्त 363 विद्यालय हैं। इन विद्यालयों में लगभग दो लाख छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। माध्यमिक स्तर तक के विद्यालयों में पढ़ रहे छात्र-छात्राओं के भी आधार लिंक को लेकर भी जिले में लापरवाही का माहौल है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार अब तक लगभग 50 प्रतिशत छात्र-छात्राओं का ही आधार लिंक हो सका है।
जिनका अब तक आधार कार्ड नहीं बन सका है, उन्हें यूनिक आईडी का विकल्प के रूप में नंबर भी नहीं दिया जा सका है। इन विद्यालयों में शिक्षण कार्य कर रहे लगभग 6 हजार 500 शिक्षकों में से लगभग 65 प्रतिशत का ही आधार कार्ड व ईमेल का ब्यौरा डीआईओएस कार्यालय में भेजा जा सका है। ऐसे में सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि योजना को लेकर जिले में कितनी लापरवाही बरती जा रही है।
लापरवाही पर होगी कार्रवाई
माध्यमिक विद्यालयों में सभी छात्र-छात्राओं का आधार लिंक का ब्यौरा 15 जनवरी तक डीआईओएस कार्यालय में जमा करने का निर्देश दिया गया है। पूर्व में 31 दिसंबर तक का समय दिया गया था। इस मामले में लापरवाही पर कार्रवाई की जाएगी।
-विनोद सिंह, डीआईओएस