आवेदक ने इस बाबत पांच वर्ष पुराने आंकड़ों की मांग की थी पर दोनों विभागों ने लिखकर दे दिया कि अब यह योजना संचालित ही नही हैं। ऐसे में कोई सूचना देना संभव नही है। विभागों की तरफ सूचना न दिए जाने पर आवेदक ने राज्य सूचना आयोग में अपील की है।
मालूम हो कि बसखारी थाना क्षेत्र के समडीह सराय निवासी रामचन्द्र जायसवाल ने एक वर्ष पूर्व पहले मुख्य विकास अधिकारी/ जनसूचना अधिकारी को पत्र देकर वर्ष 2010-11, 2011-12 व 2012-13 में समाज कल्याण व पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग को शुल्क प्रतिपूर्ति में मिले धन, धन के खाते और उसके संचालक की बाबत सूचना मांगी थी।
इसके साथ ही धनराशि से लाभान्वित होने वालों, उनकी राशि, छात्र संख्या और विद्यालयों को किए गए भुगतान की बाबत भी सूचना मांगी गई। पर विभाग वे इसकी कोई सूचना नहीं दी। इस मामले में आवश्यक सूचना न दिए जाने पर रामचन्द्र ने आयोग में शिकायत की। वहां से सीडीओ को नोटिस जारी कर तीन जुलाई 2015 को व्यक्तिगत रूप से उपस्थिति होने के लिए तलब कर लिया गया।
सीडीओ ने इस पर दोनों विभाग के अधिकारियों को आयोग के निर्देशों का हवाला देते हुए आवश्यक सूचना उपलब्ध कराने को कहा। आयोग को भी पत्र भेजकर कहा कि सूचना उपलब्ध न करा पाने पर संबंधित विभागों के अधिकारी ही उत्तरदायी होंगे।
सीडीओ के इस पत्र के बाद आवश्यक सूचना देने की बजाए पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग ने गत 18 जून को तथा समाज कल्याण विभाग ने 19 जून को पत्र लिखकर आवेदक को यह जानकारी दी कि यह योजना ही संचालित नहीं है।
ऐसे में किसी भी बिन्दु पर सूचना दिया जाना संभव नहीं है। इस पत्र के बाद अब आवेदक ने पूरा मामला फिर से आयोग के समक्ष ले जाने का निर्णय लिया है। कहा कि यह योजना महज दो वर्ष से रुकी है, जबकि उनके द्वारा पूर्व के वर्षों में लागू योजना की जानकारी चाही गई थी।