खराब गुणवत्ता वाले ट्रांसफार्मरों व विद्युत तारों समेत अन्य उपकरणों से जो चपत विभाग को लग रही है, उसे लेकर भी विभाग का रवैया सुस्त है। इसके उलट उपभोक्ताओं पर ही भार डालना अत्यंत अनुचित व गैर जिम्मेदाराना निर्णय है।
बढ़ती महंगाई के बीच बिजली दरों में हुई वृद्धि ने उपभोक्ताओं को चोट पहुंचाई है।
जर्जर हो चुके विद्युत उपकरणों के बीच पावर कॉर्र्पोरेशन को सुचारु बिजली उपलब्ध कराने की फिक्र तो नहीं है, लेकिन उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ डालता जा रहा है। न तो जर्जर हो चुके उपकरणों को बदला जा रहा है और न ही ट्रांसफार्मरों की गुणवत्ता पर ध्यान दिया जा रहा है। नतीजा आए दिन ट्रांसफार्मर फुंक रहे हैं।
इससे पावर कॉर्र्पोरेशन को तगड़ी चपत लग रही है। संसाधनों की बेहतरी करने की तरफ उसका तनिक भी ध्यान नहीं है। विद्युत दर में लगभग 15 फीसदी की वृद्धि की गई है। अगले माह का बिल जब उपभोक्ता अदा करेंगे, तो उन्हें बढ़ी हुई कीमतें अदा करनी पड़ेंगी। इसे लेकर रविवार को लोगों से अमर उजाला टीम ने जब वार्ता की, तो उनका दर्द छलक उठा।
सामाजिक कार्यकर्ता डा. रमाकांत मिश्र ने कहा कि पावर कॉर्र्पोरेशन को चाहिए था कि वह पहले ॅसंसाधनों को बेहतर करे। इसके बाद भी बिजली दर में वृद्धि करे। सराफा व्यवसायी वीरेंद्र सेठ ने कहा कि पावर कॉर्र्पोरेशन का जितना ध्यान बिजली दर बढ़ाने में है, यदि उतना ही ध्यान बिजली चोरी रोकने पर हो जाए, तो शायद बिजली दर बढ़ाने की नौबत ही न आए।
व्यापारी नेता जयराम संगवानी का कहना था कि पावर कॉर्र्पोरेशन को अपना पूरा ध्यान लाइन लॉस को नियंत्रित करने में लगाना चाहिए। इसके अलावा ट्रांसफार्मर की गुणवत्ता पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। कारण यह कि उपकरणों के खराब होने से विभाग को तगड़ी चपत लगती है।
यदि इसमें सुधार हो जाए, तो शायद विद्युत दर बढ़ाने की जरूरत न पड़े। अधिवक्ता गोपालजी शुक्ल ने कहा कि पावर कॉर्र्पोरेशन की कमियों का खमियाजा उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है। विभागीय कर्मचारियों की मिलीभगत के चलते विद्युत चोरी पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।
यदि इस पर नियंत्रण कर लिया जाए, तो लाइन लास में भी कमीं आएगी और राजस्व की भी क्षति नहीं होगी। वरिष्ठ चिकित्सक डा. हैदर मेहदी ने कहा कि संसाधन बढ़ाए बगैर विद्युत दर बढ़ाया जाना कतई उचित नहीं है। यदि उपभोक्ताओं को सुचारु बिजली मिले, तो बिल अदा करने में भी समस्या नहीं होगी।