अपने हितों की आवाज बुलंद कर रहे पंचायतीराज विभाग व ग्राम्य विकास विभाग के कर्मचारी आमने-सामने दिख रहे हैं। एक तरफ जहां पंचायती राज विभाग के अधिकारी व कर्मचारी स्वयं को ग्राम्य विकास विभाग से अलग करने की मांग कर रहे हैं।
वहीं दूसरी तरफ ग्राम्य विकास विभाग पंचायतीराज विभाग को अपने विभाग में विलय करने की मांग पर अड़ गया है। इसी को लेकर मंगलवार को ग्राम्य विकास विभाग के कर्मियों ने आकस्मिक अवकाश किया। इससे ब्लॉक व जिला मुख्यालय में कई दफ्तर बंद रहे।
दूसरी तरफ पंचायती राज विभाग के कर्मियों ने दो घंटे अधिक कार्य कर अपनी आवाज उठाई। कर्मचारियों की इस जंग में फरियादियों को खासी मुश्किलें हो रही हैं। प्रांतीय आह्वान पर मंगलवार को ग्राम्य विकास विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों ने आकस्मिक अवकाश ले लिया।
पंचायती राज विभाग को अपने विभाग में विलय करने की मांग की। ग्राम्य विकास विभाग के इस आकस्मिक अवकाश के कारण जिला मुख्यालय पर डीडीओ, पीडी सहित अन्य विभागों के कार्यालय बंद रहे। जिले के सभी नौ ब्लॉक मुख्यालय पर खंड विकास अधिकारी के कार्यालय में ताला लगा रहा है।
खंड विकास अधिकारी के अधीनस्थ सभी कर्मचारी भी दिन भर आकस्मिक अवकाश पर रहे। विभिन्न कार्यों से पहुंचे फरियादियों को इससे मुश्किलों का सामना करना पड़ा। दूसरी तरफ पंचायती राज कर्मचारी संघ के अध्यक्ष प्रभात सिंह के आह्वान पर पंचायतीराज कर्मचारियों ने दो घंटे अधिक काम कर विरोध दर्ज कराया।
उन्होंने कहा कि ग्राम्य विकास विभाग द्वारा उठाई जा रही मांग गलत है। जब उनके विभाग का मंत्री अलग है और उच्चाधिकारी अलग हैं तो फिर उन्हें किसी विभाग के अधीनस्थ रखना जायजा नहीं है।
सभी विकास खंडों पर एडीओ पंचायत की मौजूदगी में पंचायती राज विभाग के कर्मचारियों ने ड्यूटी की। कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी तब तक उनका आंदोलन थमने वाला नहीं है।