शासन के तमाम दिशा निर्देशों के बाद शिक्षकों ने छात्र-छात्राओं को विद्यालय लाने के लिए कोई गंभीर प्रयास नहीं किए। एक दिन पूर्व न तो कहीं जागरू कता रैली निकाली गई और ना ही अभिभावकों से कोई संपर्क किया गया। नतीजॉतन बुधवार को परिषदीय विद्यालयों में काफी कम बच्चे पहुंचे।
जो पहुंचे भी, वह कुछ देर तक खेल कूदकर वहां से घर चले आए। मध्याहन भोजन के समय अवश्य कुछ बच्चे विद्यालय पहुंचे लेकिन पहले ही दिन ज्यादातर विद्यालयों में एमडीएम के चूल्हे नहीं जले। पहले ही दिन से सभी के हाथों में नई पुस्तकें उपलब्ध कराने का शासन प्रशासन का दावा भी खोखला साबित हुआ।
ज्यादातर छात्र छात्राएं पुरानी ड्रेस व बगैर कापी-किताब के ही स्कूल पहुंचे। बच्चे कम होने से विद्यालय में मौजूद शिक्षक शिक्षिकाएं भी बच्चों को पढ़ाने की बजाए आपस में बांते करते रहे। बुधवार को अमर उजाला की टीम ने कुछ परिषदीय विद्यालयों का जायजा लिया तो ज्यादातर स्कूलों की यही तस्वीर रही।