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सरकारी अस्पतालों में सुरक्षा के प्रबंध नहीं

Fri, 02 Jun 2017 11:36 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/अंबेडकरनगर
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अस्पताल - फोटो : symbolic
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बड़े सरकारी अस्पतालों में शामिल जिला अस्पताल के साथ ही जलालपुर में स्थित एकमात्र महिला अस्पताल में मरीजों व उनके तीमारदारों की सुरक्षा पूरी तरह भगवान भरोसे है। दोनों अस्पतालों में अक्सर होने वाले हंगामे तथा अन्य प्रकार की सुरक्षा की जरूरत को देखते हुए लंबे समय से पुलिस चौकी स्थापित किए जाने की जरूरत चली आ रही है।
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इसके बावजूद प्रशासन की तरफ से इसे लेकर कोई गंभीरता नहीं दिखाई जा सकी है।  गत दिवस लखनऊ के केजीएमयू में महिला के साथ हुई गैंगरेप की वारदात ने अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी। इस घटना ने लोगों को झकझोरकर रख दिया। राजधानी से इतर बात की जाए तो मरीजों व उनके तीमारदारों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जिले में भी किसी प्रकार के प्रबंध नहीं हैं।

न तो जिला अस्पताल में सुरक्षा की व्यवस्था है और न ही जलालपुर स्थित एकमात्र महिला अस्पताल में ही महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कोई ठोस कदम उठाया गया है। जिला अस्पताल में लगभग चार वर्ष पूर्व एक मरीज की मौत के बाद तीमारदारों द्वारा किए गए हंगामें व तोड़फोड़ के बाद पुलिस चौकी स्थापित किए जाने की मांग ने जोर पकड़ लिया था।
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घटना के बाद कुछ दिन तक तो पुलिसकर्मी अस्पताल परिसर में तैनात किए गए, लेकिन समय बीतने के साथ ही वह भी चले गए। नतीजतन मौजूदा समय में सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह भगवान भरोसे है। कुछ ऐसा ही हाल जिले के जलालपुर में स्थित एकमात्र महिला अस्पताल का भी है। यहां भी मांग के बावजूद महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है।

ऐसे में केजीएमयू जैसी वारदात जिले के प्रमुख अस्पतालों में घट जाए, इससे इंकार नहीं किया जा सकता। पहितीपुर की सुमित्रा के मुताबिक जिला अस्पताल में सुरक्षा के कोई प्रबंध नहीं हैं। दिन में तो साइकिल स्टैंड के इर्द गिर्द दो होमगार्ड नजर भी आ जाते हैं, लेकिन शाम होते ही वह भी चले जाते हैं।

मोहसिनपुर के अब्दुल रफीक ने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था न होने से आए दिन मोबाइल व साइकिल की चोरी हुआ करती है। सीएमएस डॉ. केएस पांडेय ने बताया कि जिला अस्पताल में पुलिस चौकी की स्थापना के लिए शासन को पत्र लिखा जा चुका है। महिला मरीजों के हित को लेकर वे सब निजी तौर पर आवश्यक प्रयास सुनिश्चित करते हैं। किसी भी महिला या अन्य मरीज को असुविधा नहीं होने दी जा रही। 
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