गोद लिए जाने के बाद संबंधित गांव के ग्रामीणों को उम्मीद थी कि जिन मूलभूत समस्याओं से वे जूझ रहे हैं, उससे उन्हें निजात मिल जाएगी। हालांकि गोद लिए लंबा समय गुजर जाने के बाद भी गांव में विकास कार्य गति नहीं पकड़ सका। इससे ग्रामीणों की उम्मीदें भी समय के साथ टूटने लगीं।
मूलभूत सुविधाओं से जूझ रहे ग्रामीणों को योजनाओं का समुचित लाभ मिले और गावों में विकास कार्य तेजी से आगे बढ़े, इसके लिए सभी जिलास्तरीय अधिकारियों को कम से कम दो दो गांव गोद लिए जाने का निर्देश एक वर्ष पूर्व शासन स्तर से दिया गया था। इस पर जिले के 42 अधिकारियों ने कुल 84 गांवों को गोद लिया।
अधिकारियों द्वारा गांवों को गोद लिए जाने से संबंधित गांव के ग्रामीणों में खुशी की लहर दौड़ गई। उन्हें लगा कि जिन मूलभूत समस्याओं से वे जूझ रहे हैं, वे शीघ्र ही दूर हो जाएंगी। हालांकि जैसे जैसे समय बीतता गया, वैसे वैसे उनकी उम्मीदें टूटने लगीं। कारण यह कि यह योजना सिर्फ गोद लिए जाने की प्रक्रिया तक ही सीमित रही।
अकबरपुर विकास खंड के सिकंदरपुर के राकेश व संतोष ने कहा कि जब गांव को गोद लिया गया तो उन्हें लगा कि अब विकास कार्य में तेजी आएगी। हालांकि अब तक ऐसा कुछ भी नहीं हो सका है। मूलभूत समस्याएं जस की तस हैं।
बसखारी ब्लॉक के हरैया गांव के मोहम्मद जमाल व राघवेंद्र ने कहा कि गांव में कोई भी विकास इस प्रकार का नहीं हो सका है जिससे यह लगे कि गांव को किसी जिलास्तरीय अधिकारी द्वारा गोद लिया गया है। बीते दिनों अभियान चलाकर बच्चों का वजन किया गया था।
साथ ही कुपोषित व अतिकुपोषित बच्चों को चिह्नित कर उन्हें आयरन की गोलियों सहित अन्य आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराई गई थीं। इससे आगे कुछ नहीं हुआ। डीएम द्वारा गोद लिए गांव रामनगर ब्लाक के मरौचा व टांडा ब्लॉक के अमीनपुर तथा सीडीओ द्वारा गोद लिए गांव भियांव ब्लॉक के नेवादा कला व भीटी के धरमपुर गांव में भी सिर्फ कुपोषित व अतिकुपोषित बच्चों के चिंहाकन का ही कार्य हुआ।
इन गांवों को कुपोषणमुक्त करने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चलाया गया। साथ ही गांव को स्वच्छ रखने के लिए साफ-सफाई की भी व्यवस्था की गई। हालांकि इन गांवों को शौचालय से संतृप्त करने के लिए अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा सका है।