जलालपुर। जलालपुर शिक्षा क्षेत्र के अधिकांश परिषदीय स्कूलों में अभी भी कई सुविधाओं की दरकार है। खासकर विद्यालयों में बाउंड्रीवाल व गेट न होने से छात्र छात्राओं व शिक्षकों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। सबसे ज्यादा दिक्कत तो बच्चों व विद्यालय की सुरक्षा को लेकर है। कई बार शिक्षण कार्य के दौरान मवेशी परिसर में प्रवेश कर जाते हैं, और समस्या खड़ी कर देते हैँ। इतना ही नहीं सड़क किनारे स्थित विद्यालयों में शिक्षकों को सबसे ज्यादा मुश्किल बच्चों की सुरक्षा को लेकर रहती है। फिर भी शिक्षा क्षेत्र में 95 परिषदीय विद्यालय हैं, जिनमें बाउंड्रीवाल व गेट की दरकार है।
शिक्षा क्षेत्र में जलालपुर में कुल 165 प्राथमिक विद्यालय व 62 उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। प्राथमिक विद्यालयों और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कुल 23 हजार छात्र-छात्राएं अध्यनरत हैं। इन विद्यालयों के भवन का तो निर्माण हुआ है, लेकिन अधिकांश विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा के लिए विद्यालय के चारों तरफ बनने वाली चहारदीवारी अब तक नहीं बनवाई जा सकी है। जलालपुर शिक्षा क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालयों पर नजर डाली जाए तो यहां 64 प्राथमिक विद्यालयों में बाउंड्रीवाल नहीं बन सका है।
इसमें आजनपारा, शेखपुरा, राजकुमारी हाजीपुर, खानपुर उमरन, कबूलपुर, रुकुनपुर, भगलापुर, ताहापुर, देवरहा, हुसैनपुर, श्यामपुर, दरियापुर, बीबीपुर भुसौली प्रथम, टिकरी, गानेपुर, मीरापुर, संबलपुर, कल्याणपुर व सिसारा आदि विद्यालयों में चहारदीवारी नहीं बन सकी है। 31 उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं जिनमें बाउंड्रीवाल व गेट की दरकार है। इसमें उच्च प्राथमिक विद्यालय नसोपुर, सोहगूपुर, देवरहा रामपुर दुबे, बसिया, उसरहा, सोनगांव, अल्लीपुर, डीघी, कालेपुर, उमरन आदि शामिल हैं। बाउंड्रीवाल न होने से करीब 9 हजार से अधिक छात्र छात्राओं व शिक्षक शिक्षिकाओं को मुश्किलों का सामना करना पड़ रा है।
स्थानीय प्रदीप कुमार पाण्डेय, जयप्रकाश, रोहित तिवारी, नंदलाल यादव व राजेश यादव आदि ने जिला प्रशासन से परिषदीय विद्यालयों की बेहतरी सुनिश्चित कराए जाने की मांग की है। कहा कि बाउंड्रीवाल व गेट न होने से शिक्षण कार्य पर प्रतिकूल असर पड़ता है। नन्हे मुन्ने बच्चों की सुरक्षा का भी खतरा बना रहता है। ऐसे में नौनिहालों की सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए अविलंब इन विद्यालयों में बाउंड्रीवाल आदि की सुविधा उपलब्ध करायी जाएगी। मौजूदा समय में ग्रामीण क्षेत्र में छुट्टा मवेशियों की संख्या बढ़ गई है। ऐसे में कई विद्यालयों में आए दिन यह मुसीबत का सबब बनते रहते हैं। उधर एसडीएम धीरेन्द्र श्रीवास्तव का कहना है कि जल्द ही बेसिक शिक्षा विभाग को पत्र लिखा जाएगा। सभी विद्यालयों में आवश्यक सुविधाएं मुहैया करायी जाएंगी।