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धान किसानों का 27 करोड़ दबाए बैठी हैं सरकारी एजेंसियां

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अंबेडकरनगर। जिले के पांच हजार से अधिक किसान मौजूदा समय में आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। दरअसल, विभिन्न एजेंसियों के क्रय केंद्र साढ़े 27 करोड़ रुपये की राशि दबाए बैठे हैं। भुगतान न होने से संबंधित किसानों को आर्थिक मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। भुगतान के लिए वे लगातार जिम्मेदार अधिकारियों के कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। इस बीच खाद्य एवं विपणन विभाग ने 90 प्रतिशत से अधिक धान खरीद का दावा किया है, लेकिन अभी भी तमाम किसान बिक्री करने के लिए धान निकटवर्ती केंद्र पर लेकर पहुंच रहे हैं, लेकिन उन्हें मायूसी हाथ लग रही है। ऐसे में अब किसान आढ़तियों के हाथों औने-पौने दाम पर उपज बेचने को मजबूर हो रहे हैं।
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जिले में धान किसानों की मुश्किलें दूर नहीं हो रहीं। पहले तो निकटवर्ती क्रय केंद्र पर धान की बिक्री करने में किसानों को मुश्किलें उठानी पड़ीं तो अब भुगतान के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के कार्यालयों का चक्कर लगाने को मजबूर हो रहे हैं। गौरतलब है कि गत 1 नवंबर से जिले के विभिन्न क्षेत्रों में स्थापित 6 एजेंसियों के 95 क्रय केंद्रों पर धान की खरीद शुरू हुई थी। शासन स्तर पर जिले को 1 लाख 32 हजार 600 मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य दिया गया था। शुरुआत से ही किसानों को धान बिक्री करने में विभिन्न प्रकार की मशक्कत का सामना करना पड़ा। कभी क्रय केंद्र प्रभारियों की मनमानी के चलते धान खरीद का कार्य गति नहीं पकड़ सका तो कभी भंडारण की समुचित व्यवस्था न होने से किसानों को मायूसी हाथ लगी।
किसानों ने किसी प्रकार धान की बिक्री तो कर ली, लेकिन अब उन्हें भुगतान के लिए परेशान होना पड़ रहा है। खाद्य एवं विपणन विभाग के लिपिक एस कुमार के अनुसार अब तक 16 हजार 549 किसानों का 119712.486 एमटी धान की खरीद की जा चुकी है, जो निर्धारित लक्ष्य के सापेक्ष 90.281 प्रतिशत है। ज्यादातर किसानों का भुगतान किया जा चुका है, लेकिन पांच हजार से अधिक किसानों का 27 करोड़ 52 लाख रुपये का भुगतान अब तक नहीं हो सका है।
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अकबरपुर के किसान मंगल वर्मा व जियाराम पटेल ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि बड़ी मुश्किलों के बाद उनके धान की खरीद हुई, तो अब भुगतान नहीं हो रहा है। इससे उनके समक्ष विभिन्न प्रकार की आर्थिक मुश्किलें खड़ी हो रही हैं। भीटी के मानप्रकाश ने कहा कि मार्च माह के प्रथम सप्ताह में उनकी पुत्री का विवाह है। धान बिक्री का भुगतान न होने से उन्हें विवाह को सकुशल निपटाने में मुश्किल खड़ी हो रही है। इसके लिए कई बार जिम्मेदार अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। जलालपुर के हरीराम व दयाराम ने कहा कि अभी भी तमाम किसान ऐसे हैं, जिनके धान की खरीद अब तक नहीं हो सकी है। वे संबंधित क्रय केंद्र पर लेकर पहुंच रहे हैं, लेकिन उन्हें मायूसी हाथ लग रही है। किसानों के हित को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों को ठोस कदम उठाना चाहिए।
खाद्य एवं विपणन कार्यालय के अनुसार, शासन के निर्देशानुसार 30 दिसंबर के बाद होने वाली खरीद का भुगतान पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम के द्वारा भुगतान किए जाने का निर्देश है। साथ ही पूर्व में खरीदे गए धान की फीडिंग सिस्टम पर करने का निर्देश दिया गया है। फीडिंग में विलंब होने के चलते ही भुगतान में समस्या उत्पन्न हो रही है। जो फीडिंग हो भी गई है, उनका प्रिंट आउट एनआईसी लखनऊ द्वारा तैयार किया जाना है। उसमें भी विलंब होने के चलते भुगतान में विलंब हो रहा है।
खाद्य विभाग के नौ केंद्रों पर खरीद का कार्य जारी है। जिन किसानों का धान केंद्रों पर हैं, उनकी खरीददारी के बाद ही नए किसानों के धान की खरीददारी की जाएगी।
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अजित प्रताप सिंह, खाद्य एवं विपणन अधिकारी
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