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कंट्रोल रूम को प्रभावी बनाना जरूरी

Mon, 04 Jan 2016 11:09 PM IST
अबेडकरनगर/अमर उजाला ब्यूरो
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कहीं कहीं तो इतचनी देर से पहुचती है कि तब तक अपराधी वारदात को अंजाम देने के बाद भाग चुके होते हैं। बीते दिनों ही जिला मुख्यालय पर दिनदहाड़े बीड़ी कंपनी के कर्मचारियों से साढ़े 37 लाख की लूट मामले में भी कंट्रोल रूम को सूचना के तत्काल बाद यदि पुलिस ने घेराबंदी की होती, तो शायद बदमाशों को पकड़ा जा सकता था।
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घटना व दुर्घटना होने पर पुलिस की तत्काल सहायता लिए जाने को लेकर चलाई जा रही 100 नंबर डायल योजना जिले में लोगों के लिए बेमकसद साबित नहीं हो रही है। कभी फोन न उठने की शिकायत रहती है, तो कभी सूचना मिलने के बाद किसी प्रकार की प्रतिक्रिया न दिए जाने की।

ज्यादातर मामलों में त्वरित कार्रवाई की बजाए पुलिस उस समय घटनास्थल पर पहुंचती है, जब बदमाश घटना को अंजाम देकर काफी दूर चले जाते हैं। सिर्फ मामूली वारदातों में ही नहीं, कई गंभीर मामलों में भी पुलिस का यही रवैया रहता है।
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गौरतलब है कि घटना दुर्घटना होने पर त्वरित पुलिस की सहायता लेने के लिए जिले में न सिर्फ 100 नंबर डायल करने की सुविधा है, बल्कि सीयूजी नंबर 9454417373 के अलावा एक अतिरिक्त बेसिक फोन नंबर 05271-244814 की सुविधा भी उपलब्ध है। इन नंबराें पर आने वाली काल को रिसीव करने के लिए कुल आठ कर्मचारियों की तैनाती की गई है।

इसके बावजूद जिले में इस सुविधा का समुचित लाभ दिलाने को लेकर पुलिस प्रशासन गंभीर नहीं हैं। बीते दिनों ही जिला मुख्यालय पर दिनदहाड़े यूनियन बैंक के समक्ष से एक बीड़ी कंपनी के कर्मचारियों से बाइक सवार सशस्त्र बदमाशों ने साढ़े 37 लाख रुपये लूट लिए थे।

घटना की तत्काल सूचना 100 नंबर व सीयूजी नंबर पर पुलिस को दी गई थी। घटना के काफी देर बाद पुलिस मौके पर पहुंच सकी थी। यदि समय पर मौके पर पहुंचकर घेराबंदी की होती, तो शायद बदमाश पुलिस की गिरफ्त में आ जाते।

बीते दिनों ही बसखारी आजमगढ़ मार्ग पर सड़क दुर्घटना की जानकारी होने के बाद भी पुलिस लगभग आधा घंटा देर से घटनास्थल पर पहुंची थी। जब तक पुलिस पहुंचती स्थानीय लोग घायलों को निकटवर्ती अस्पताल पहुंचा चुके थे।
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