अंबेडकरनगर। रहमत और बरकत के महीने रमजान में जिले भर में इबादत का माहौल बना हुआ है। छठवें दिन मंगलवार को भी रोजेदारों ने पूरे एहतराम और अकीदत के साथ रोजा रखा।
सुबह सहरी के बाद लोगों ने दिनभर सब्र और परहेजगारी के साथ समय बिताया। मस्जिदों में पांचों वक्त की नमाज अदा की गई। रात में तरावीह की नमाज में भी बड़ी संख्या में नमाजी शामिल हुए। कई लोग घरों में भी तिलावत और दुआ में मशगूल रहे। शाम को अजान के साथ रोजा इफ्तार किया गया। मस्जिदों और घरों में इफ्तार की खास तैयारियां रहीं। खजूर से रोजा खोला गया। इससे भाईचारे की मिसाल देखने को मिली। धार्मिक विद्वानों ने रमजान की अहमियत पर प्रकाश डाला। रोजा इंसान को संयम और अनुशासन सिखाता है। इस दौरान ज्यादा से ज्यादा दुआ करने और नेक काम करने की सलाह दी गई। छठवें रोजे के मौके पर लोगों ने मुल्क में अमन-चैन और खुशहाली की दुआ मांगी। रमजान के इस पाक महीने में मस्जिदों के साथ घरों में भी रौनक बनी हुई है। बच्चे और बुजुर्ग सभी इबादत में हिस्सा ले रहे हैं।
बख्शीश का महीना है रमजान
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इस पवित्र महीने में गुनाहों की माफी और बख्शीश की खास रहमत मानी जाती है। मुसलमानों के लिए रमजान का महीना इसलिए भी बेहद अहम है। क्योंकि इसी महीने अल्लाह तआला ने पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के जरिए अपनी मुकद्दस किताब कुरआन शरीफ को नाजिल फरमाया था।
- मौलाना मोहम्मद कासिम
पहला रोजा रख इबादत भी की
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रमजान के पाक महीने का पहला रोज़ा रखकर इबादत भी की। घर में सभी लोग रोजे से थे, इसलिए रोजा रखना आसान हो गया। घर वालों ने इफ्तार में मेरे मनपसंद की चीजें पकाईं।
- अस्फिया खातून (7 वर्ष)