अंबेडकरनगर। कर्बला के शहीदों की याद में मनाया जाने वाला मुहर्रम अब अंतिम दौर में है। रविवार को दस मोहर्रम है। ऐसे में एक दिन पहले जिले में मजलिसों व मातम का दौर तेज रहा। सुबह से ही मजलिस व मातम का दौर शुरू हो गया, जो देर रात तक चलता रहा। इमामबारगाहों व अजाखानों से या हुसैन की सदाएं लगातार बुलंद होती रहीं। जगह-जगह आयोजित मजलिस में उलेमा कर्बला के शहीदों पर प्रकाश डालकर माहौल को भावुक बना दिया। इस बीच शनिवार को हुसैन की अजादारी करने वाले जिला मुख्यालय से अलग-अलग माध्यम से ताजिया अपने अपने अजाखानों में ले जाते दिखे। यह सिलसिला सुबह से ही शुरू हो गया जो शाम तक चलता रहा।
गत 21 अगस्त से शुरू हुआ मोहर्रम अब अंतिम दौर में है। रविवार 30 अगस्त को अजाखानों व इमामबारगाहों में रखे ताजियों को सुपुर्दे खाक कर दिया जाएगा। कोरोना संकट को देखते हुए शासन द्वारा जारी गाइड लाइन के अनुसार इस बार इमाम हुसैन के मानने वालों ने छोटे छोटे ताजिए ही अजाखानों में रखे हैं। शनिवार को सुबह से ही जिला मुख्यालय से ताजियों को लोगों द्वारा अपने अपने अजाखानों में ले जाने का सिलसिला शुरू हो गया जो शाम तक चलता रहा। इस बीच कोरोना संकट के चलते इस बार चौक पर ताजिए नहीं रखे गए।
उधर, मुहर्रम का अंतिम दौर होने के चलते शनिवार को मजलिस व मातम का दौर भी तेज हो गया। शनिवार को सुबह से ही अजाखानों व इमामबारगाहों से या हुसैन या अब्बास की सदाएं बुलंद होने लगीं जो देर रात तक जारी रहीं। इस बीच उलेमा ने मजलिसों में इमाम हुसैन की शहादत पढ़कर माहौल को गमगीन बना दिया। साथ ही युवाओं से आह्वान भी किया कि वे इमाम हुसैन के बताए रास्ते पर चलते हुए सब्र से काम लें और कोई ऐसा कार्य न करें, जिससे किसी प्रकार की मुश्किल पैदा हो।