राजेसुल्तानुपर। सरयू नदी की बाढ़ ने आलापुर तहसील क्षेत्र में करीब हजार बीघा धान की फसल नष्ट कर दी है। इससे लागत के हिसाब से करीब 80 लाख रुपये का नुकसान हुआ है, जबकि उत्पादन होने पर करीब दो करोड़ रुपये का लाभ किसानों को होता। धान की फसल चौपट हो जाने से 500 से अधिक परिवारों के सामने बड़ा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। फसल की उपज बेचकर घर का खर्च चलाने की बात तो दूर इस बार किसानों के पास दो वक्त के भोजन के लिए भी राशन मिल पाना मुहाल नजर आ रहा है। संबंधित गांव के ग्रामीणों को अब शासन-प्रशासन का ही सहारा है।
सरयू नदी के जलस्तर में भले ही कमी आ गई है, लेकिन बाढ़ प्रभावित इलाकों की मुसीबत अब और बढ़ती जा रही है। खेतों से जैसे-जैसे पानी नीचे उतर रहा है तो दृश्य देखकर किसानों के होश फाख्ता हो रहे हैं। जिन खेतों में कुछ दिन पहले धान की फसल लहलहा रही थी, वहां अब हरियाली का नामों निशान तक नहीं रह गया है। धान की फसल की जगह अब बालू का सिल्ट जमा हो गई है। यहां तक कि एक दूसरे के खेत की सीमाएं भी मिट चुकी हैं। किसानों को पता ही नहीं चल पा रहा है कि उनकी खेत की सीमा क्या है। फसल बर्बाद होने व खेत में बालू जमा हो जाने से किसान खासे परेशान हैं। एक तरफ उन्हें खेतों से बालू की सफाई का संकट है तो दूसरे तरफ वर्ष भर परिवार का खर्च कैसे चलेगा इस बात की चिंता है। जिस फसल के बलबूते ग्रामीणों ने अपने वर्ष भर की तमाम योजनाएं बनायी थीं, वह सब तो चकनाचूर हुआ ही है।
साथ ही दो वक्त की रोटी का प्रबंध करना मुश्किल दिख रहा है। यह समस्या सिर्फ एक दो गांव के किसानों की नही है, बल्कि दर्जनों गांव शामिल हैं। इसमें आराजी देवारा, माझा कम्हरिया, इटौरी ढोलीपुर, कमालपुर पिकार, सरायहंकार, गोपालपुर, कम्हरिया, चांडीपुर, बंगालपुर, जैती, बिड़हर, हिछनापुर, केवटला सहित दर्जनों गांव ऐसे हैं जहां किसानों की धान की फसलें बर्बाद हो गई हैं। खेतों में हरियाली की जगह अब रेत चमक रही है।
कम्हरिया गांव निवासी किसान कृपाशंकर सिंह ने बताया कि उनका करीब 25 बीघा धान की फसल बर्बाद हो गई। इटौरा ढोलीपुर के राघवेंद्र सिंह, तालुकदार सिंह, परमात्मा व रामकेश यादव की खेती सरयू नदी के बाढ़ की भेंट चढ़ गई। किसानों का कहना है कि इस महामारी के बीच यह बाढ़ उनके लिए किसी त्रासदी से कम नही है। पहले से ही आर्थिक तंगी चल रही थी। धान की फसल के बदौलत भविष्य की कई योजनाएं संजोए थे, जो बाढ़ के पानी के साथ सब बह गईं। किसानों का कहना है कि अब जो कुछ भरोसा है वह शासन प्रशासन पर ही है। दो वक्त की रोटी मिलना भी आने वाले समय में मुहाल हो जाएगा। सामाजिक सामाजिक कार्यकर्ता भावेश सिंह गंगे ने बाढ़ प्रभावित किसानों की नष्ट हुई धान की फसल का आकलन करा कर मुआवजा देने की मांग की है।
उन्होंने मुख्यमंत्री पोर्टल पर इसके लिए आवेदन भी किया है। कहा कि करीब 1 हजार बीघा धान की फसल बर्बाद हुई है। यदि शासन प्रशासन समय रहते निर्णय नहीं लेगी तो किसानों के समक्ष भारी मुश्किल खड़ी हो जाएगी। सामाजिक कार्यकर्ता मित्रसेन यादव ने भी प्रशासन से मदद की गुहार की है।किसानों के अनुसार लगभग 80 लाख रुपए की लागत से रोपी गई धान की फसल बर्बाद हुई है। उपज होने पर दो करोड़ से अधिक का फायदा हो सकता था।
बाढ़ से प्रभावित किसानों की मदद प्रशासन लगातार कर रहा है। किसानों को परेशान होने की जरूरत नहीं है। आने वाले समय में भी उन्हें हरसंभव मदद दी जाएगी। फसलों के नुकसान का भी आकलन कराया जाएगा। शासन को इसकी रिपोर्ट भी भेजी जाएगी। प्रयास होगा कि उनके नुकसान की भरपाई कराई जाए।
- धीरेंद्र श्रीवास्तव, उपजिलाधिकारी, आलापुर