खुद भूखी रहती है, लेकिन बच्चों को भूखा नहीं रहने देती। यह बातें रविवार को अकबरपुर नगर के इमामबारगाह में आयोजित मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना सै. शुजा हैदर जैदी ने कही।
अकबरपुर नगर के मीरानपुर निवासी सै. शब्बीर हुसैन की पत्नी अनवरी बेगम के इसाले सवाब की मजलिस में मौलाना जैदी ने कहा कि जब किसी घर में बेटी पैदा होती है, तो अल्लाह उसके लालन पालन की जिम्मेदारी स्वयं लेता है। बेटियां किसी भी घर के लिए रहमत होती हैं।
यही बेटी कभी बेटी बनकर, तो कभी भाई बनकर और कभी मां बनकर अपनी उपयोगिता सिद्ध करती है। एक मां ही ऐसी है, जो अपने बच्चों पर कभी भी कि सी भी मुसीबत को नहीं आने देती। यदि उसका बच्चा किसी परेशानी में होता है, तो मां तड़प जाती है और अल्लाह अपने बच्चों की सलामती की दुआ करती है।
आधुनिकता के इस दौर में हम इतने आगे बढ़ते जा रहे हैं कि मां की अहमियत को ही नहीं समझते, जबकि अल्लाह ने कहा है कि जब भी अपनी मां के सामने जाओ, तो तुम्हारे कंधे इस तरह से झुके हों, जैसे गुलाम अपने मालिक के सामने जाता है।
कभी भी मां से ऊंची आवाज में बात न करो और यदि उसे कुछ दो, तो तुम्हारा हाथ नीचे होना चाहिए। बाद में मौलाना जैदी ने कर्बला के शहीदों पर विस्तार से प्रकाश डालकर माहौल को भावुक बना दिया। इस दौरान डा. मोहम्मद हसन, तनवीर हुसैन, तस्वीर हुसैन, हाजी मेहदी रजा, आरिफ अनवर, मौलाना मोहम्मद अब्बास आदि मौजूद रहे।