जिले की 50 से अधिक बैंक शाखाओं में धन का अभूतपूर्व संकट खड़ा हो गया है। इनमें बैंक आफ बड़ौदा, सेंट्रल बैंक व बड़ौदा ग्रामीण बैंक की शाखाएं शामिल हैं। दरअसल इन बैंकों को रिजर्व बैंक आफ इंडिया से नोटों की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। इसका सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है।
बुधवार को विभिन्न बैंक शाखा पहुंचे हजारों उपभोक्ताओं को निराश हो लौटना पड़ा। एटीएम सेवाओं तक का संचालन सुचारु रूप से कर पाना कठिन हो गया है। इससे उपभोक्ताओं के बीच सहालग के दौर में हाहाकार मच गया है। लोग धननिकासी के लिए दूरदराज तक के एटीएम का चक्कर लगाने को विवश हो रहे हैं।
इसके बाद भी ज्यादातर लोगों को सफलता नहीं मिल पा रही है। जिले के विभिन्न बैंकों में धन का संकट पिछले कई दिनों से चला आ रहा था लेकिन बुधवार को यह और व्यापक होकर सामने आ गया। ग्रामीण क्षेत्र की तमाम बैंक शाखाओं में उपभोक्ता पहुंचे तो धननिकासी की उनकी उम्मीद पूरी नहीं हो सकी।
कई जगहों पर उपभोक्ताओं को तरह-तरह के बहाने बनाकर टाल दिया गया जबकि कई जागरूक उपभोक्ताओं को बताना पड़ा कि धनाभाव के चलते भुगतान नहीं हो पा रहा है। इन दिनों सहालग का दौर होने के कारण उपभोक्ताओं को रकम की जरूरत ज्यादा ही है। इसके बावजूद उन्हें भुगतान के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है।
जिले में अलग-अलग कुल 15 बैंकों की 171 शाखाएं स्थापित हैं। इनमें से सबसे ज्यादा संकट बैंक आफ बड़ौदा की लगभग सभी शाखाओं में है। इस बैंक की कुल 42 शाखाएं जिले में हैं। इन शाखाओं में धनाभाव के चलते भुगतान हद दर्जे तक प्रभावित हुआ है। ज्यादातर शाखाओं से उपभोक्ताओं को बैरंग लौटना पड़ा।
कटेहरी प्रतिनिधि के अनुसार सेंट्रल बैंक की अहिरौली समेत एक अन्य शाखा में भुगतान के लिए पहुंचे दर्जनों उपभोक्ता हंगामा करने के बाद भी भुगतान नहीं पा सके। भीटी तहसील मुख्यालय व अन्य क्षेत्र की बैंक शाखाओं में पहुंचे सैकड़ों उपभोक्ता दिनभर बैंक अधिकारियों से मिन्नतें करते रह गए लेकिन इसके बाद भी निराशा ही हाथ लगी।
जलालपुर, आलापुर, अकबरपुर व टांडा तहसील क्षेत्र के तमाम बैंक शाखाओं का भी बुधवार को यही हाल रहा। एलडीएम एपी सिंह ने बताया कि रिजर्व बैंक से विभिन्न बैंक के क्षेत्रीय मुख्यालयों को जो भुगतान प्राप्त होना था, वह नहीं हो पाया। इसके चलते ही यह संकट खड़ा हुआ है।
सबसे ज्यादा प्रभावित बैंक आफ बड़ौदा की 42 शाखाएं हो रही हैं। अन्य बैंक भी प्रभावित हैं। आगे दो-चार दिन यही स्थिति रही तो स्टेट बैंक समेत अन्य बैंक शाखाओं को भी भुगतान में कठिनाई होगी। सभी बैंक प्रबंधन अपने कोटे की रकम मिलने के लिए लगातार आरबीआई अधिकारियों के संपर्क में हैं।