अंबेडकरनगर। अकबरपुर की महानगर कॉलाेनी में श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन रविवार को भागवत के विभिन्न प्रसंगों का वर्णन किया गया। प्रवाचक सर्वेश्वर शरण ने बताया कि कर्म के अनुसार ही जीवन की दिशा तय होती है। सुख और दुख को समान भाव से स्वीकार करना चाहिए। संयम और विवेक से जीवन में स्थिरता आती है। सामाजिक आयोजनों से आपसी सहयोग और एकता बढ़ती है।
प्रवाचक ने कहा कि श्रीमद्भागवत मानव जीवन को समझने और सही दिशा देने वाला ग्रंथ है। कथा के दौरान उन्होंने जीवन में धर्म, कर्म और आचरण के संतुलन पर विशेष जोर दिया। प्रवाचक ने बताया कि भागवत में यह स्पष्ट किया गया है कि मनुष्य का जीवन केवल भौतिक उपलब्धियों के लिए नहीं, बल्कि आत्मिक विकास के लिए भी है। व्यक्ति को अपने कर्मों के प्रति सजग रहना चाहिए, क्योंकि कर्म ही भविष्य का निर्माण करते हैं।सुख और दुख जीवन के स्थायी सत्य हैं। इन्हें समान भाव से स्वीकार करने से मानसिक संतुलन बना रहता है। प्रवाचक ने उदाहरणों के माध्यम से समझाया कि भागवत के संदेश आज के सामाजिक जीवन में भी पूरी तरह प्रासंगिक हैं।