अंबेडकरनगर। जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन आने वाले 60 से 70 मरीजों में से 20 से 25 ऐसे मरीज हैं, जो मोबाइल और कंप्यूटर के अत्यधिक इस्तेमाल के कारण आंखों में जलन, सूखापन और धुंधलापन जैसी शिकायतों से पीड़ित हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि डिजिटल उपकरणों का अंधाधुंध उपयोग आंखों के स्वास्थ्य को सीधे तौर पर प्रभावित कर रहा है।
डिजिटल युग में स्मार्टफोन और सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग न केवल मानसिक स्वास्थ्य के लिए, बल्कि शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी एक गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। विशेष रूप से, आंखों से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं, जो बच्चों और युवाओं में अधिक चिंताजनक है। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. आरएस वर्मा के अनुसार, देर रात तक मोबाइल फोन का प्रयोग नींद के पैटर्न को गंभीर रूप से बाधित करता है। मोबाइल स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी मेलाटोनिन हार्मोन के उत्पादन को रोकती है, जो नींद के लिए आवश्यक है। इस कारण अनिद्रा की समस्या बढ़ती है, जिसका सीधा असर आंखों की थकान और अन्य समस्याओं पर पड़ता है। कुछ मरीज आंखों के नीचे सूजन और ड्रेनेज से संबंधित समस्याओं की शिकायतें भी लेकर आ रहे हैं।
निकट दृष्टि दोष का बढ़ता प्रकोप
लंबे समय तक स्क्रीन पर ध्यान केंद्रित करने की आदत, खासकर बच्चों और किशोरों में, मायोपिया यानी निकट दृष्टि दोष के मामलों में वृद्धि का एक प्रमुख कारण बन रही है। लगातार स्क्रीन पर नजरें टिकाए रखने से आंखों की मांसपेशियों पर अत्यधिक दबाव पड़ता है। इसके अतिरिक्त, स्क्रीन का उपयोग करते समय पलकें झपकाने की आवृत्ति कम हो जाती है, जिससे आंखों की सतह पर नमी की कमी हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप, आंखों में दर्द, थकान और धुंधलापन जैसी समस्याएं बनी रहती हैं।
बचाव और रोकथाम के उपाय
आंखों में किसी भी प्रकार का बदलाव या परेशानी महसूस होने पर तुरंत किसी योग्य नेत्र रोग विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।
स्क्रीन का उपयोग करते समय, आंखों को नियमित अंतराल पर आराम देना महत्वपूर्ण है।
मोबाइल को आंखों के स्तर पर रखें और गर्दन झुकाकर फोन देखने से बचें।