अंबेडकरनगर। पुलिस हिरासत में आजमगढ़ निवासी युवक जियाउद्दीन की मौत को लेकर पुलिस विवेचना में नई मनमानी सामने आई है। विवेचना में एक तरफ आजमगढ़ में युवक की उसके एक साथी द्वारा की गई पिटाई से गंभीर घायल होने का जिक्र किया गया है। तो वहीं यह भी उल्लेख है कि जब वह यहां पुलिस से मदद मांगने आया तो नाॅनवेज भोजन के लिए प्रसिद्ध एक होटल में युवक ने पुलिसकर्मियोंं के साथ दावत भी उड़ाई। जियाउद्दीन के भाई शहाबुद्दीन का कहना है कि अब गंभीर रूप से घायल युवक को पहले इलाज की जरूरी थी या मुर्गा खाने की यह एक बड़ा सवाल है।
तीन वर्ष पहले पुलिस हिरासत में जियाउद्दीन की मौत मामले में सीजेएम सुधा यादव द्वारा पुलिस की फाइनल रिपोर्ट निरस्त कर दी गई है। दरअसल आठ पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या व अपहरण का केस शहाबुद्दीन की तहरीर पर दर्ज हुआ था। इसमें पुलिस ने विवेचना में जो मनमानी बरती उसकी एक-एक कर पोल अपनी ही विवेचना में दर्ज तथ्योंं से खुल रही है।
पुलिस की विवेचना कहती है कि जियाउद्दीन को आजमगढ़ में ही वहीं के निवासी कमर नामक व्यक्ति ने बुरी तरह पीटा, इसके बाद जियाउद्दीन अंबेडकरनगर पुलिस से मदद मांगने पहुंच गया। पुलिस ने विवेचना में लिखा है कि जियाउद्दीन ने स्वॉट टीम के साथ अकबरपुर नगर के कालिका होटल में खाना भी खाया। अब पुलिस की इसी विवेचना पर सवाल खड़ा करते हुए शहाबुद्दीन कहते हैं कि थोड़ी देर के लिए यह मान भी लिया जाए कि उनके भाई की निर्मम पिटाई आजमगढ़ में ही किसी ने कर दी। इसके बाद अगर वे अंबेडकरनगर आ भी गए तो उनकी स्वॉट टीम के प्रभारी व सिपाहियों से मुलाकात कैसे हो गई। कोई भी आम व्यक्ति इन लोगों से सीधे किसी जिले में नहीं मिल सकता।
वे कहते हैं कि मेरा भाई यदि गंभीर पिटाई के बाद अंबेडकरनगर आया तो उसे तत्काल इलाज की जरूरत थी या फिर मुर्गे की दावत उड़ाने की। ऐसी पिटाई जिसमें किसी की मौत हो जाए वह व्यक्ति पहले अपने इलाज पर जोर देगा या फिर दावत पर। यह पुलिस का फर्जीवाड़ा है जो आगे कोर्ट में एक मिनट भी नहीं टिकेगा। (संवाद)
पुलिस बताए कि किसने दिया पैसा
शहाबुद्दीन कहते हैं कि पुलिस ने विवेचना में जिस होटल का जिक्र किया है, उस होटल में सिर्फ नॉनवेज बनता है। हम कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर पुलिस से यह सवाल करेंगे कि वह यह भी बताए कि जब स्वॉट टीम मेरे भाई के साथ दावत उड़ा रही थी तो क्या उसका पैसा मेरे भाई से लिया गया। जिसे पीटकर मरणासन्न किया गया हो क्या पुलिस ने उससे दावत का पैसा दिलाया। हम कोर्ट के जरिए यह भी पूछेंगे कि यदि पुलिसकर्मियों ने पैसा दिया तो क्या उससे मदद मांगने वाले प्रत्येक व्यक्ति को इस तरफ दावत दी जाती है। सवाल यह भी होगा कि क्या दावत खिलाना जरूरी था या इलाज कराना।