कन्वर्जन कास्ट के साथ उचित मात्रा में अनाज उपलब्ध है। इसके बाद भी जिले में एमडीएम योजना का समुचित लाभ छात्र-छात्राओं को नहीं मिल रहा है। मौजूदा समय में 1 हजार 978 विद्यालयों के सापेक्ष 75 विद्यालयों में एमडीएम योजना पूरी तरह ठप है।
इन विद्यालयों में अध्ययनरत आठ हजार से अधिक छात्र-छात्राओं को बिना भोन के घर लौटना पड़ रहा है। इसके पीछे कारण अधिकारियों की लापरवाही व त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में ग्राम प्रधान के प्रचार प्रसार में व्यस्त होना बताया जा रहा है।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के नजदीक आने के साथ ही इसका प्रतिकूल प्रभाव विभिन्न प्रकार की योजनाओं पर भी पड़ने लगा है। चुनाव के कारण जो योजना प्रभावित हो रही है, उसमें केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही अति महत्वाकांक्षी एमडीएम योजना भी है।
विभागीय आंकड़ों के मुताबिक जिले के कुल 1 हजार 978 विद्यालयों में एमडीएम योजना का संचालन किया जा रहा है। इनमें 1 हजार 352 प्राथमिक, 520 उच्च प्राथमिक, 80 सहायता प्राप्त, दो समाज कल्याण व 24 मदरसे शामिल हैं। योजना के तहत लगभग 2 लाख 19 हजार छात्र-छात्राएं लाभान्वित हो रहे हैं।
योजना के संचालन में किसी प्रकार की बाधा न हो, इसके लिए बीते दिनों शासन से सभी विद्यालयों को कन्वर्जन कास्ट की धनराशि उपलब्ध कराने के साथ-साथ आवश्यक मात्रा अनाज भी उपलब्ध करा दिया गया था। इन सबके बाद भी इस योजना का समुचित लाभ छात्र-छात्राओं को नहीं मिल रहा है।
कहीं मेन्यू के अनुसार भोजन नहीं बन रहा है, तो कहीं ग्राम प्रधान की लापरवाही से एमडीएम का चूल्हा नहीं जल पा रहा है।
नाम न छापने की शर्त पर अकबरपुर शिक्षा क्षेत्र के एक प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक ने बताया कि ग्राम प्रधान के चुनाव प्रचार में लगे होने के कारण बीते लगभग एक पखवारे से एमडीएम ठप पड़ा हुआ है।
एक ग्राम प्रधान ने कहा कि एमडीएम योजना के सुचारु संचालन की बड़ी जिम्मेदारी होती है। वे सुबह से ही चुनाव प्रचार प्रसार में लग जाते हैं। इसके कारण वे एमडीएम पर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं।