इससे 60 हजार से अधिक छात्र छात्राएं प्रभावित हैं। खास यह कि विद्यालयों में न सिर्फ आवश्यक मात्रा में राशन उपलब्ध है, बल्कि कन्वर्जन कास्ट भी मौजूद है। बावजूद इसके योजना ठप चल रही है। इसकी मुख्य वजह चुनाव के मद्देनजर संबंधित ग्राम प्रधानों का योजना के सुचारु संचालन को लेकर हाथ खड़े करना बताई जा रही है।
मालूम हो कि एमडीएम योजना का समुचित लाभ 600 विद्यालयों में अध्यनरत लगभग 60 हजार छात्र-छात्राओं को महज इसलिए नहीं मिल पा रहा है, क्योंकि ग्राम प्रधानों ने योजना के सुचारु संचालन को लेकर हाथ खड़े कर दिए हैं। दरअसल मौजूदा समय में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की गहमागहमी है।
ग्राम प्रधान के चुनाव के लिए आरक्षण सूची जारी हो चुकी है। ऐसे में कभी भी ग्राम प्रधान के चुनाव की घोषणा हो सकती है। इसके चलते अधिकांश ग्राम प्रधानों ने योजना के संचालन को लेकर असमर्थता जतानी शुरू कर दी है। जैसे जैसे समय बीतता जा रहा है, एक एक कर विद्यालयों में योजना के चूल्हे ठंडे होते जा रहे हैं।
विभागीय आंकड़ों के मुताबिक जिले के कुल 2 हजार 10 विद्यालयों में योजना के तहत छात्र छात्राओं को भोजन दिया जा रहा है। इनमें 1352 प्राथमिक विद्यालय व 520 उच्च प्राथमिक विद्यालय शामिल हैं। इसके अलावा मदरसों व माध्यमिक विद्यालयों में भी छात्र-छात्राओं को योजना के तहत भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। चुनाव के चलते 600 विद्यालयों के छात्र-छात्राओं को मायूस होकर लौटना पड़ रहा है।
खास यह कि संबंधित विद्यालयों में न सिर्फ प्रचुर मात्रा में खाद्यान्न उपलब्ध है, बल्कि कन्वर्जन कास्ट भी है। इसके बाद भी योजना पूरी तरह ठप चल रही है। संबंधित विद्यालयों के अभिभावकों का कहना है कि यदि ग्राम प्रधान योजना को लेकर दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं तो संबंधित विद्यालय का खाता एकल कर योजना का सुचारु संचालन किया जाना चाहिए। विभागीय अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि योजना को लेकर विभागीय अधिकारी ही गंभीर नहीं हैं।
बीएसए डा. राजबहादुर मौर्य ने बताया कि योजना पर त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव का सीधा प्रभाव पड़ा है। कहीं ग्राम प्रधान के चलते भोजन नहीं बन रहा, तो अधिकांश अधिकारियों व कर्मचारियों के मतदान में ड्यूटी के चलते योजना का सुचारु संचालन नहीं हो पा रहा है।