प्रत्येक वर्ष होने वाली बरसात या भूकंप के खतरों के बीच ऐसे भवनों में रहना निश्चित ही जान जोखिम में डालना है। विकल्पों के अभाव में जिले में सैकड़ों लोग ऐसे भवनों में रह रहे हैं।
जिले के नगरीय क्षेत्रों की बात तो दूर, जिला मुख्यालय पर ही कई ऐसे सरकारी व निजी भवन ऐसे हैं, जो लंबे समय से अत्यंत जर्जर हैं। इसके बाद भी उसमें लोग रह रहे हैँ। जान जोखिम में डालकर सरकारी भवनों में रहने वाले लोग लंबे समय से किसी सुरक्षित भवन में स्थानांतरण की मांग कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन को को सुध नहीं है।
बीते दिनों आए भूकंप के झटकों ने कई घरों व प्रतिष्ठानों में दरारें पैदा कर दी थीं। यह संयोग ही रहा कि इन झटकों को जर्जर हो चुके भवनों ने सह लिया, वरना बड़ी घटना घट सकती थी। अकबरपुर पीएचसी परिसर में स्थित दो मंजिला आवासीय भवन पूरी तरह से जर्जर हो चुका है।
दीवारें व छतों में कई स्थानों पर दरारें पड़ गई हैं। छतों पर बड़ी बड़ी जंगली घासें उग आई हैं। इसके बावजूद इन भवनों में कर्मचारी रहने को मजबूर हैं। नाम न छापने की शर्त पर एक महिला ने कहा कि उन्हें दिन रात यह भय सताता रहता है कि कब भवन ढह जाए।
रात में ठीक से नींद नहीं आती। कहा कि सुरक्षित भवन में स्थानांतरित किए जाने की शिकायत कई बार संबंधित अधिकारियों से की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा सका है। नतीजा यह है कि खौफ के साए में रहने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
कुछ ऐसा ही हाल अकबरपुर रेलवे स्टेशन परिसर में बने आवासीय भवन का है। इस भवन को निष्प्रयोज्य घोषित किया जा चुका है। इसके बावजूद कोई अन्य विकल्प न होने के चलते लोग इसमें रहने के लिए मजबूर हो रहे हैं। आलम यह है कि दीवारें व छतें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं।
दीवारों व छतों पर बड़ी बड़ी जंगली घासे उगी हुई हैं। आम दिनों में तो फिर भी लोग किसी प्रकार रह लेते हैं, लेकिन बरसात के दिनों में समस्या और भी बढ़ जाती है। छतें जगह जगह टपकती हैं। इसके चलते लोग पूरी रात जागकर बिताते रहते हैं।