अंबेडकरनगर। धान खरीद में फर्जी हस्ताक्षर के जरिए करोड़ों के भुगतान की कोशिशों में खाद्य विभाग के भी जिम्मेदारों का गला फंस सकता है। फर्जी हस्ताक्षर का खुलासा होने से इस बीच खाद्य महकमे में हड़कंप मच गया है। प्रकरण की विभागीय जांच शुरू होने के साथ ही जिला प्रशासन ने भी पूरे मामले की निगरानी शुरू कर दी है।
धान की खरीद में बोरों के नाम पर करोड़ों का वारा न्यारा करने की कोशिशों का एक दिन पहले खुलासा हुआ है। विभाग के भीतर तो पहले से ही यह मामला चला आ रहा था लेकिन अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद अब यह मामला सार्वजनिक हुआ है। विभाग में इस मामले को यूं तो दबाए रखा गया लेकिन अब खुलासा होने के बाद हड़कंप की स्थिति है।
एक राइस मिलर द्वारा बीते तीन वर्ष के दौरान जूट की बोरी उपलब्ध कराने के बदले भुगतान का बिल अचानक थमा दिया गया। उसे तेजी से आगे बढ़ाने वाले कर्मचारियों व अधिकारियों की भूमिका अब तय हो सकती है। ऐसे में बुधवार को पूरे दिन अपना अपना गला बचाने की कोशिश चलती रही। खबर है कि जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी द्वारा की जा रही विभागीय जांच के साथ ही जिला प्रशासन ने भी पूरे मामले की निगरानी शुरू कर दी है।
दरअसल जिले के 11 क्षेत्रीय विपणन अधिकारी तथा विपणन निरीक्षक ने सामूहिक रूप से पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि हम सबका फर्जी हस्ताक्षर बनाकर भुगतान के लिए बिल दिया गया है। इसे देखते हुए ही जिला प्रशासन ने इस अत्यंत गंभीर प्रकरण में जांच जल्द पूरी करने का निर्देश दिया है। डीएम अविनाश सिंह ने कहा कि जांच जल्द पूरी कराई जाएगी। कोई भी अनियमित भुगतान नहीं होने पाएगा। (संवाद)