केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं में से एक मनरेगा जिले में अधिकारियों व कर्मचारियों की लापरवाही की भेंट चढ़ती जा रही है। वित्तीय वर्ष 2016-17 को शुरू हुए एक पखवारे से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन 930 ग्राम पंचायतों के सापेक्ष मात्र 228 ग्राम पंचायतों में ही योजना के तहत विकास कार्य प्रारंभ हो सके हैं।
शेष 702 ग्राम पंचायतों में अब तक योजना के तहत कार्य प्रारंभ ही नहीं हो सका है। नतीजा यह है कि इसका खामियाजा जिले के दो लाख से अधिक जॉब कार्डधारकों को योजना के तहत रोजगार के लिए इधर-उधर भटकने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। जिन ग्राम पंचायतों में योजना के तहत विकास कार्य शुरू हुआ है, वहां विकास कार्य धीमी गति से चल रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों में जॉब कार्डधारकों को 100 दिन का रोजगार दिलाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही मनरेगा योजना जिले में गति नहीं पकड़ पा रही है। किसी ग्राम पंचायत में योजना के तहत विकास कार्य आगे नहीं बढ़ रहा है, तो कहीं कार्य कराने के बाद जॉब कार्डधारकों को भुगतान नहीं किए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
तमाम शिकायतों के बाद भी योजना को पटरी पर लाने के लिए अधिकारियों व कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं हो रही है। इसी का नतीजा है कि योजना को लेकर लापरवाही का दौर लगातार जारी है।
विभागीय आंकड़ों के मुताबिक अकबरपुर विकासखंड में 81, कटेहरी में 77, भीटी में 72, जलालपुर में 89, टांडा में 87, जहांगीरगंज में 79, रामनगर में 79, बसखारी में 57 व भियांव में 61 ग्राम पंचायतों में योजना पूरी तरह ठप पड़ी हुई है।
जिन 228 ग्राम पंचायतों में योजना के तहत विकास कार्य चल भी रहे हैं, उसमें भी संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा लापरवाही बरती जा रही है। इन ग्राम पंचायतों में धीमी गति से विकास का पहिया आगे बढ़ रहा है। नतीजा यह है कि जिले के दो लाख से अधिक जॉब कार्डधारक रोजगार के लिए भटक रहे हैं।