अंबेडकरनगर। जलालपुर क्षेत्र में लंपी स्किन डिजीज के पांच नए मामलों ने एक बार फिर पशुपालन विभाग की चिंता बढ़ा दी है। जुलाई में तीन मवेशियों की मौत और 13 के संक्रमित मिलने के बाद हालात थोड़े सामान्य हुए थे, लेकिन अब संक्रमण ने दोबारा दस्तक दी है। पशुपालन विभाग ने संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए सीमावर्ती इलाकों में विशेष टीकाकरण अभियान शुरू किया है।
पिछले महीने जलालपुर क्षेत्र के विभिन्न गांवों में लंपी वायरस से तीन मवेशियों की मौत हुई थी, जबकि 13 संक्रमित मवेशियों का सफल इलाज कर उन्हें ठीक कर लिया गया था। अब एक बार फिर जलालपुर में पांच नए मवेशी संक्रमित पाए गए हैं, जिनका उपचार शुरू कर दिया गया है। पशुपालन विभाग की टीमें गांवों में घर-घर जाकर मवेशियों की जांच कर रही हैं। जहां भी लक्षण मिल रहे हैं, वहां तत्काल टीकाकरण किया जा रहा है। इसके साथ ही लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है।
जिले में 13 हजार से अधिक मवेशियों को लंपी वायरस से बचाव का टीका लगाया जा चुका है, जबकि विभाग का लक्ष्य 20 हजार पशुओं के टीकाकरण का है। खासतौर पर रामनगर, भियांव, बसखारी, जलालपुर, भीटी और कटेहरी ब्लॉकों में अभियान को प्राथमिकता दी जा रही है, क्योंकि ये क्षेत्र अन्य जिलों से सटे हैं और संक्रमण फैलने का खतरा अधिक है।
उपमुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. बद्री प्रसाद पाठक ने बताया कि लंपी स्किन डिजीज एक संक्रामक रोग है, जिसके लक्षणों में त्वचा पर गांठें, तेज बुखार और दूध उत्पादन में कमी शामिल है। उन्होंने पशुपालकों से अपील की कि झोलाछाप इलाज के बजाय नजदीकी पशु चिकित्सालय से संपर्क करें और समय रहते अपने मवेशियों का इलाज कराएं।