फोटो 32, अंबेडकरनगर के शहजादपुर स्थित ऐसे पावरलूम का संचालन करने वाले बुनकरों के लिए राज्य सरकार न?
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अंबेडकरनगर। राज्य सरकार द्वारा विद्युत दर में छूट की प्रतिपूर्ति योजना का समय बढ़ाए जाने का लाभ जिले के एक लाख से अधिक पॉवरलूमों के संचालकों को मिलेगा। इससे पांच लाख से अधिक बुनकरों, संचालकों व उद्योग से जुड़े अन्य व्यक्तियों ने राहत महसूस की है। हालांकि, बुनकरों का कहना है कि इस अस्थाई राहत से वे संतुष्ट नहीं हैं। सरकार को फ्लैट रेट पर ही बिजली देनी चाहिए। इससे ही बुनकर उद्योग को संजीवनी मिल सकेगी।
गौरतलब है कि अंबेडकरनगर जनपद वस्त्र उद्योग के लिए भी जाना जाता है। जिले में बने सामान्य सूती गमछे, अराफाती गमछे व लुंगी समेत शर्ट के कपड़े आदि की न सिर्फ देश के विभिन्न क्षेत्रों वरन विदेशों तक खास डिमांड है। राज्य सरकार ने एक जनपद एक उत्पाद योजना में अंबेडकरनगर को वस्त्र उद्योग के लिए निर्धारित किया है। राज्य के अन्य हिस्सों के साथ अंबेडकरनगर के बुनकर भी बीती एक जनवरी से विद्युत दरों में वृद्धि को लेकर आंदोलनरत थे। इसे लेकर कई बार हड़ताल तथा धरना प्रदर्शन भी किया जा चुका है।
बुनकरों के लंबे संघर्ष के बाद गत दिवस राज्य सरकार ने एक जनवरी 2020 से बुनकरों के लिए विद्युत दरों में छूट की प्रतिपूर्ति योजना के स्थान पर दरों में वृद्धि का जो निर्णय लिया था, उसे स्थगित कर दिया है। 15 अक्तूबर को जारी आदेश में कहा गया कि बुनकरों को अब बीते जनवरी माह से लेकर जुलाई माह तक विद्युत दरों में छूट की प्रतिपूर्ति योजना का लाभ मिलेगा। सितंबर माह के बिल का भुगतान उन्हें चार दिसंबर 2019 को जारी शासनादेश के अनुरूप करना होगा।
राज्य सरकार द्वारा ऐसे में बीते सात माह की छूट और प्रदान किए जाने का लाभ जिले के लगभग एक लाख पॉवरलूमों के संचालन पर पड़ेगा। अलग अलग ढंग से पॉवरलूमों से जुड़े बुनकरों, संचालकों, मजदूरों समेत लगभग पांच लाख व्यक्तियों ने इससे राहत महसूस की है। हालांकि एक स्वर से सभी बुनकरों का कहना है कि यह राहत अस्थाई है। इससे कोई लाभ होने वाला नहीं है। सीधे फ्लैट रेट पर बिजली देने की घोषणा होनी चाहिए।
बुनकर नेता नदीम अंसारी ने कहा कि सात माह के लिए बिजली बिल में छूट देने से कोई खास फायदा नहीं है। सरकार को स्थाई प्रबंध करना चाहिए। यह सिर्फ छलावा है। बुनकरों को फिर से आंदोलन के लिए बाध्य किया जा रहा है। बुनकर खुर्शीद ने कहा कि बुनकरों की समस्या की तरफ पूरी गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। यदि ऐसा किया गया होता तो सिर्फ सात माह की छूट जैसा कोई निर्णय न होता।