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अघोषित विद्युत कटौती से परेशान हो रहे महरुआ के बाशिंदे

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महरुआ। क्षेत्र के उपभोक्ताओं को बिजली की अघोषित कटौती से राहत नहीं मिल पा रही। लगातार पत्राचार व मौखिक शिकायत के बावजूद पॉवर कार्पोरेशन अधिकारियों को उपभोक्ताओं की हितों की कोई परवाह नहीं है। इससे उपभोक्ताओं में आक्रोश है। उनका कहना है कि इस आपूर्ति व्यवस्था से वह सब त्रस्त हो चुके हैं। सिर्फ रजिस्टर में रोस्टर के मुताबिक बिजली दौड़ रही है, लेकिन वास्तविकता इसके विपरीत है।
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बतात चलें कि महरुआ उपकेंद्र से दर्जनों गांवों की कुल करीब 40 हजार से अधिक आबादी को बिजली आपूर्ति होती है। उपभोक्ताओं को सुचारू आपूर्ति मिल सके, इसके लिए 18 घंटे का रोस्टर भी निर्धारित किया गया है, लेकिन पिछले लंबे समय से आपूर्ति व्यवस्था बदहाली के दौर से गुजर रही है। उपभोक्ताओं के मुताबिक रोस्टर के अनुरूप बिजली मिल पाना तो दूर की बात है 6 से 7 घंटे भी बिजली आपूर्ति नहीं हो पा रहा। सबसे ज्यादा खराब हालत पतौना फीडर से जुड़े उपभोक्ताओं की है। यहां से जुड़े उपभोक्ताओं का कहना है कि दिन में बमुश्किल दो घंटे ही आपूर्ति हो रही है। कभी तार टूटने का बहाना तो कभी ट्रिपिंग या फिर अन्य तकनीकी गड़बड़ी को बताकर बिजली गुल कर दिया जाता है। नतीजा यह होता है कि एक तरफ जहां पेयजल की समस्या उत्पन्न हो जाती है, वहीं बिजली से संबंधित कई कार्य बाधित हो जाते हैं।
उपभोक्ता संजीव, मैनुद्दीन, आकाश, रामखेलावन, प्रदीप आदि का कहना है कि पतौना फीडर से मिलने वाली आपूर्ति व्यवस्था से वे सब त्रस्त हो चुके हैं। न तो बिजली आने का कोई समय और न जाने का। बारिश न होने के चलते अब धान की सिंचाई की समस्या उठ खड़ी हुई है, लेकिन सुचारू आपूर्ति न होने से सिंचाई भी दिक्कत हो रही है। वहीं पॉवर कार्पोरेशन के अधिकारियों व कर्मचारियों को उपभोक्ताओं के हितों की कोई परवाह नहीं है। उपभोक्ताओं ने शासन से मामले की जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है। जेई रवीन्द्र पाल ने कहा कि ब्रेकडाउन के चलते आपूर्ति बाधित होती है। नियमानुसार आपूर्ति कराया जा रहा है।
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