अंबेडकरनगर। 13 वर्ष पूर्व दलित किशोरी का अपहरण कर उसके साथ दुष्कर्म करने के दोषी को शुक्रवार को एससी-एसटी कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। उसके ऊपर 32 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।
जहांगीरगंज स्थित एक गांव निवासी एक व्यक्ति के अनुसार 25 अप्रैल, 2012 को वह अचानक बेहोश हो गए थे। इसके बाद परिजनों ने उन्हें डॉ एसके राय के यहां भर्ती कराया था। उसी रात उनकी बेटी को गांव के ही निवासी तौफीक और उसके साथी मोहम्मद शमी ने अपहरण कर लिया था। वापस आने पर बेटी की खोजबीन की, रिश्तेदारों से संपर्क किया, लेकिन कुछ पता नहीं चल सका। इस दौरान घर में एक मोबाइल नंबर सादे कागज पर लिखा मिला था। उस पर संपर्क करने पर वह नंबर तौफीक का निकला था।
बेटी के बारे में पूछने पर उसने धमकी दी थी। इसके बाद तौफीक शमी और रऊफ के खिलाफ दुष्कर्म समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज कराया था। विवेचना में अयोध्या नामक युवक की मदद से तौफीक उनकी बेटी को मुंबई लेकर गया था। वहां उसके साथ दुष्कर्म भी किया था। इसी मामले की सुनवाई करते हुए विशेष न्यायाधीश अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम रामविलास सिंह ने दोषी तौफीक को सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। आरोपी शमी व अयोध्या प्रसाद को आरोप से बरी कर दिया है।