भू जलस्तर में लगातार होती कमी को देखते हुए वर्षा जल के संचयन पर प्रदेश व केंद्र सरकार का जोर बढ़ा है। ऐसा इसलिए जिससे की आने वाले दिनों में आम लोगों को होने वाली कठिनाइयों से निजात दिलाया जा सके।
इसके बावजूद जिले में वर्षा जल के संचयन या फिर भूगर्भ जलस्तर की बेहतरी के लिए कोई प्रत्यक्ष व ठोस प्रयास होते नजर नहीं आते। भूगर्भ जल की बेहतरी में आदर्श जलाशय योजना निश्चिततौर पर मील का पत्थर साबित हो सकती थी, लेकिन यह योजना भी यहां फ्लाप साबित हुई है।
तालाब तो खूब खोदे गए, लेकिन अधिकांश में पानी नदारद है। तालाब की खुदाई में उससे जुड़े लोग तो मालामाल हुए, लेकिन उसका उद्देश्य धराशायी हो गया। 850 तालाब पूरे जिले में ऐसे हैं, जो इस योजना के तहत सूखे पड़े हैं। इन्हें विभिन्न माध्यमों से पानी से भरा रखा जाता तो भी गांवों में भूगर्भ जलस्तर कुछ हद तक दुरुस्त रह सकता था।
नए तालाबों की खुदाई को लेकर भी सुस्ती का माहौल है। छोटे छोटे नालों व रजवहा का पानी भी बर्बाद होने से बचाने को लेकर कोई प्रबंध नहीं दिखता।
बीते दिनों मुख्य विकास अधिकारी ने तमसा नदी के जल को लेकर आवश्यक कार्य योजना का निर्देश दिया था, लेकिन उस पर भी अभी तक कोई खास अमल शुरू नहीं हो सका। ग्रामीण क्षेत्रों में वर्षा जल के संचयन को लेकर पसरी बेफिक्री के चलते ही कटेहरी व भीटी विकास खंड क्षेत्र सेमी क्रिटिकल जोन में शुमार हैं।इन ब्लाकों में भी भूगर्भ जल स्तर की बेहतरी के लिए अन्य ब्लाकों जैसे ही सुस्ती दिखाई पड़ती है।
और तो और बड़े सरकारी व निजी भवनों पर जो उपकरण लगाए जाने चाहिए वह तमाम भवनों पर नदारद हैं। ऐसे भवनों को नोटिस देने या फिर उस पर आवश्यक प्रबंध कराने की भी सुध प्रशासन को नहीं है। उधर अपर
जिलाधिकारी रामसूरत पाण्डेय ने बताया कि लघु सिंचाई व जल निगम आदि विभागों को इस बारे में बीते दिनों ही कई निर्देश दिए गए थे। उनके द्वारा आवश्यक कार्य योजना तैयार की जा रही है।