एक्साइज ड्यूटी के विरोध में लगभग एक माह से चली आ रही बेमियादी हड़ताल को लेकर शुक्रवार को सराफा व्यापारियों में दो फाड़ हो गया। जिला मुख्यालय के ज्यादातर व्यापारियों ने जहां बिना किसी आह्वान के ही अपनी-अपनी दुकानें खोल दीं, वहीं टांडा समेत अन्य क्षेत्रों में हड़ताल अभी जारी है।
गौरतलब है कि एक्साइज ड्यूटी बढ़ाए जाने के विरोध में जिले भर के सराफा व्यवसायी लगभग एक माह से अपने प्रतिष्ठान बंद कर आंदोलनरत थे। जिला मुख्यालय पर शुरू हुआ यह आंदोलन शुरुआती दौर में ही ग्रामीण क्षेत्रों में भी फैल गया था।
नतीजतन जिले में पहली बार किसी आह्वान पर प्रतिष्ठानों की इतनी लंबी अवधि की हड़ताल चली। शुरुआती दौर में तो सराफा व्यापारियों में हड़ताल को लेकर उत्साह दिख रहा था लेकिन एक पखवारा बीतने के बाद ही ज्यादातर सराफा व्यापारियों में बेचैनी साफ दिखाई पड़ने लगी थी।
हड़ताल समाप्त करने को लेकर लगातार दबाव बना आ रहा था लेकिन पहल कौन करे, इसका संकट बना था। हड़ताल के दौरान ही व्यापारियों ने दिल्ली प्रदर्शन में भी जिले से मजबूत भागीदारी तय की। तय हुआ था कि 10 अप्रैल तक हड़ताल जारी रखी जाएगी।
इस बीच जिला मुख्यालय के ज्यादातर सराफा व्यवसायियों ने शुक्रवार को अपने-अपने प्रतिष्ठान बिना किसी आह्वान या नतीजे के खोल दिए। इसे लेकर सराफा व्यवसायियों में दो फाड़ भी होता दिखा। कई प्रतिष्ठान विरोध स्वरूप शुुक्रवार को बंद भी रहे।
कई सराफा कारोबारियों ने नया संगठन बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। उधर जिला मुख्यालय के बाद हड़ताल के पक्ष में पूरी मजबूती से खड़े रहे टांडा के सराफा कारोबारी अभी भी आंदोलित हैं। सराफा एसोसियेशन अध्यक्ष कैलाशनाथ अग्रवाल ने बताया कि हड़ताल अभी आगे जारी रहेगी। जिले के कई अन्य क्षेत्रों में भी हड़ताल छिटपुट तौर पर शुक्रवार को जारी रही।