सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का भवन।
अंबेडकरनगर। जिले में फाइलेरिया उन्मूलन के लिए किए गए संक्रमण मूल्यांकन सर्वेक्षण (टीए सर्वे) में जलालपुर ब्लॉक हॉट स्पॉट के रूप में सामने आया है। यहां छह से सात वर्ष की आयु के 29 बच्चों में फाइलेरिया के लक्षण मिले हैं।
बीमारी के प्रसार को रोकने के लिए प्रशासन मंगलवार से विशेष अभियान शुरू कर रहा है, जिसके तहत क्षेत्र के 3.33 लाख लोगों को बचाव की दवा खिलाई जाएगी। जलालपुर के 42 गांवों में कुल 3,33,212 लोगों को दवा खिलाने का लक्ष्य है।
इस कार्य के लिए 377 टीमें गठित की गई हैं, जिनकी मॉनिटरिंग के लिए पर्यवेक्षक तैनात रहेंगे। स्वास्थ्य विभाग की टीमें हर घर जाकर अपनी उपस्थिति में ही लोगों को दवा का सेवन कराएंगी। सीएमओ डॉ. संजय कुमार शैवाल ने बताया कि सर्वे के दौरान अन्य ब्लॉकों में केवल चार-पांच मरीज ही मिले थे, जबकि जलालपुर में यह संख्या अधिक है।
इसीलिए यहां थ्री ड्रग थेरेपी (अल्बेंडाजोल, डीईसी और आइवरमेक्टिन) अपनाई जाएगी। अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में टू ड्रग थेरेपी दी जाएगी। डॉ. शैवाल ने बताया कि यह दवा पूरी तरह सुरक्षित है और इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं है। उन्होंने कहा कि दवा का सेवन कभी भी खाली पेट न करें।
g बनाई गईं आठ रैपिड रिस्पांस टीमें: जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. गौतम कुमार मिश्रा ने बताया कि फाइलेरिया रोग मादा क्यूलेक्स मच्छर के काटने से फैलता है। इस बचाव अभियान के लिए गठित हर टीम में दो-दो सदस्यों को शामिल किया गया है। अभियान की सुचारू रूप से निगरानी के लिए ब्लॉक स्तर पर 63 पर्यवेक्षक और आठ रैपिड रिस्पांस टीमें तैनात की गई हैं। यह दवा गंभीर रूप से गर्भवती महिलाओं और दो वर्ष से छोटे बच्चों को नहीं दी जाएगी।