क्रय केन्द्रों पर भी विभागीय स्तर से सुविधाएं तक नहीं उपलब्ध करायी जा सकी। किसान अपनी उपज को बेचने के लिए क्रय केन्द्रों का चक्कर काट रहे हैं। कहीं बोरा नहीं है तो कहीं धन न होने की बात कहकर क्रय केन्द्र प्रभारियों द्वारा किसानों को लौटाया जा रहा है।
जिले में मूल्य समर्थन योजना के तहत खरीफ वर्ष 2015-16 में धान की उपज का वाजिब मूल्य किसानों को दिलाने के लिए शासन स्तर से एक नवंबर से क्रय केन्द्रों के संचालन शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए जिले में छह क्रय एजेंसियों को धान खरीदने की जिम्मेदारी सौंपी गई।
इसमें खाद्य विभाग के छह केन्द्र, पीसीएफ के 32, यूपी एग्रो स्टेट एक, यूपीएसएस चार, राज्य कर्मचारी निगम दो तथा भारतीय खाद्य निगम के दो क्रय केंद्र हैं। इस तरह कुल 48 क्रय केन्द्र स्थापित किए गए हैं। शासन से इस वर्ष कामन धान का मूल्य 1410 रुपये व ए ग्रेड के धान 1450 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है।
क्रय एजेंसियों के अलावा विभागीय स्तर से सात साधन सहकारी समितियों को भी धान क्रय करने के निर्देश दिए गए हैं। इन सभी केंद्रों पर अब तक कहीं भी धान खरीद का काम शुरू नहीं हो सका है।
अकबरपुर के किसान रामभुवन यादव ने बताया कि सूखे के चलते इस वर्ष धान की फसल पैदा करने में काफी लागत आयी है। शासन से धान का जो समर्थन मूल्य तय किया गया है, वह बहुत ही कम है। कृषक संदीप सिंह ने कहा कि इस वर्ष बारिश कम होने से धान की फसल को कई बार सींचना पड़ा।
इन एंजेसियों को मिला क्रय करने का लक्ष्य
इस वर्ष धान खरीद का लक्ष्य बीते वर्ष की अपेक्षा दूना कर दिया गया है। जिसमें मार्केटिंग एजेंसी को 20 हजार मीट्रिक टन, पीसीएफ को 34 हजार 500 मीट्रिक टन, यूपी एग्रो को एक हजार मीट्रिक टन, यूपीएसएस को छह हजार, राज्य कर्मचारी निगम को तीन हजार 500, एफसीआई को 66 हजार 300 मीट्रिक टन धान खरीद करने का लक्ष्य दिया गया है।
बोले अधिकारी
जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी एके झॉ ने बताया कि शासन से धान खरीद के लिए निर्धारित एजेंसियों ने क्रय केन्द्र खोल दिए हैं। अधिकांश किसानों का धान अभी तैयार नहीं हो सका है। इसके चलते ही खरीद का कार्य शुरु नहीं हो सका है। विभाग के खाते में पर्याप्त धन भी है, और क्रय केन्द्रों पर आवश्यक तैयारियां भी पूरी है।