18 से अधिक सीटें जीतने के चलते सर्वाधिक तेजी बसपा के खेमे में है, जहां मौजूदा अध्यक्ष शोभावती वर्मा का ही फिर से चुनाव लड़ना तय माना जा रहा है। उधर सपा में दो दावेदार सामने हैं, जिन्हें निर्दलियों व सत्ता की ताकत के बूते वैतरणी पार हो जाने की उम्मीद है। दोनों ही खेमों में बैठकों का दौर जारी रहा।
जिला पंचायत के सभी 43 सदस्यों का परिणाम घोषित होने के बाद अब अध्यक्ष पद की दौड़ शुरू हो गई है। कांग्रेस का इस चुनाव में खाता भी नहीं खुला, जबकि निर्णायक भूमिका में आने की उम्मीद लगाए बैठी भाजपा के हाथ भी कोई बड़ी उपलब्धि सामने नहीं आई है। ऐसे में मुकाबला बसपा व सपा के ही बीच रहने की उम्मीद है।
बसपा के हौसले इस बार ज्यादा बुलंद हैं, क्योंकि उसे पिछली बार से भी ज्यादा सीट मिली है। पूर्व मंत्री लालजी वर्मा की पत्नी शोभावती वर्मा इस समय जिला पंचायत की अध्यक्ष हैं और उन्होंने फिर से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीता है। उन्हीं का फिर से जिला पंचायत अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ना तय माना जा रहा है।
कारण यह कि 18 सीटें तो बसपा के घोषित प्रत्याशियों ने जीती है, जबकि चार अन्य भी इसी खेमे के माने जा रहे हैं। बुधवार को पूर्व मंत्री लालजी वर्मा ने आगामी रणनीति को लेकर पार्टी पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं के साथ आवश्यक विचार-विमर्श किया।
समाजवादी पार्टी की तरफ से विजयी हुए भीटी के जिला पंचायत सदस्य सुधीर सिंह उर्फ मिंटू जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं। पूर्व ब्लॉक प्रमुख अनिल सिंह उन्हें पार्टी से टिकट दिलाने के साथ ही निर्दलियों को अपने पाले में लाने की कोशिश में जुट गए हैं।
पूर्व प्रमुख ने मंगलवार व बुधवार को कई जिपं सदस्यों से संपर्क भी साधा। एक अन्य सपा नेता जिला पंचायत सदस्य रणविजय सिंह भी टिकट के दावेदार हैं, लेकिन वे तभी चुनाव लड़ेंगे, जब पार्टी उन्हें उम्मीदवार बनाएगी।