अंबेडकरनगर। जमीन का पता ही नहीं, करोड़ों के निवेश का प्रस्ताव कर डाला। कुछ इस तरह से अंबेडकरनगर में निवेश के नाम पर मनमानी की गई। करोड़ों की लागत से अलग अलग क्षेत्र में निवेश करने का प्रस्ताव तो तमाम व्यापारियों व नागरिकों ने कर दिया, लेकिन संबंधित उद्योग को लगाने के लिए उनके पास भूमि ही उपलब्ध नहीं है।
ऐसे कई निवेशकों ने सरकार से भूमि मिलने का सपना संजो रखा है। बात यहीं तक सीमित नहीं। तमाम निवेशकों ने इस आधार पर भी प्रस्ताव कर डाला है कि सरकार उन्हें उद्योग लगाने के लिए ठीक ठाक रकम भी देगी। हर्रे लगे न फिटकरी, पर रंग चोखा वाली धारणा को आधार मानकर ही ऐसे निवेशकों ने अपने प्रस्ताव सौंप डाले हैं।
जिले में निवेश के नाम पर सामने आए निवेशकों ने बिना किसी तैयारी के ही निवेश का प्रस्ताव कर डाला। सामान्य तौर पर किसी उद्योग की स्थापना के लिए या तो अपनी भूमि होनी चाहिए या फिर लीज पर ली गई भूमि हो।
भूमि उपलब्धता के बाद ही उद्योगों को लगाने के लिए किसी भी प्रस्ताव को आगे बढ़ाने की जरूरत होती है। बड़े मामलों में तो विशेष आधार पर भूमि की उपलब्धता भी कराई जाती है लेकिन सामान्य तौर पर छोटे छोटे व्यवसाय व उद्योग की स्थापना के लिए भूमि उपलब्ध कराने का कोई प्राविधान नहीं रहा है।
इसके बावजूद ऐसे लोगों ने भी बीते दिनों जिले में आयोजित इंवेस्टर्स समिट में अपने प्रस्तावों को शामिल करा लिया जिनके पास न तो भूमि है और न ही पर्याप्त पैसे का प्रबंध। 40 करोड़ की लागत से टेक्सटाइल्स उत्पाद के प्रोजेक्ट का प्रस्ताव सौंपने वाले अंबिका प्रसाद ने बताया कि उनके पास टांडा रोड पर धागा फैक्टरी में चार बीघा भूमि है।
जो प्रस्ताव दिया है, उसके लिए बीस बीघा अतिरिक्त भूमि की जरूरत होगी। अभी भूमि नहीं है। सरकार मदद के लिए आगे आएगी तो भूमि की उपलब्धता कर ली जाएगी। ग्रीन एनर्जी के लिए एबीएस इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड ने 195 करोड़ रुपये का प्रस्ताव सौंपा है।
संस्था से जुड़े विजय तोमर ने बताया कि अभी जमीन नहीं है। प्रोजेक्ट पास हुआ तो जमीन की व्यवस्था हो जाएगी। हो सकता है कि प्रशासन की तरफ से ही लीज पर जमीन मिल जाए।
टांडा में सौ करोड़ रुपये की लागत से वस्त्र उद्योग से जुड़ी मशीन लगाने का प्रस्ताव विभाग के रिकार्ड में निसार के नाम से दर्ज है। निसार से पूछा गया कि इस उद्योग से जुड़ी मशीनें कहां लगाई जाएंगी। इसके लिए कहां पर जमीन है।
वे बोले कि पहले सरकार की तरफ से मदद सामने आए फिर जमीीन का प्रबंध भी हो जाएगा। उसमें कोई दिक्कत नहीं होने पाएगी। आशा हॉस्पिटल्स के नाम से 23 करोड़ रुपये के तीन प्रस्ताव सौंपे गए हैं। इनके प्रतिनिधि से वार्ता हुई तो उनके द्वारा भी वह स्थान या जमीन नहीं बताई जा सकी, दजहां पर संस्थान स्थापित करना है। इसी तरह कुछ अन्य लोगों के पास भी अभी जमीन की उपलब्धता नहीं है।
उपायुक्त उद्योग आशुतोष पाठक ने मंगलवार को बताया कि सभी निवेशकों ने प्रस्ताव स्वयं से किया है। कई निवेशकों ने जनसेवा केंद्र का सहारा लिया है। विभाग की तरफ से कोई भी प्रस्ताव ऑनलाइन दर्ज नहीं कराया गया है। निवेशकों ने स्वयं या फिर अन्य माध्यमों से जो भी ब्यौरा पोर्टल पर दर्ज किया, वहीं सामने आया है।
सारथी निवेश पोर्टल पर प्रस्ताव को शामिल कराने के लिए संबंधित व्यक्ति के मोबाइल पर ओटीपी जाने की प्रक्रिया है। संबंधित व्यक्ति के ओटीपी देने पर ही उसके नाम से प्रस्ताव ऑनलाइन भरा जा सकता है। ऐसे में किसी के द्वारा यह कहना है कि उसे जानकारी नहीं थी, यह तथ्यहीन है। सभी निवेशकों ने सोच समझकर ही आवेदन किया है। उसी के अनुरूप इंटेंट फाइल हुआ है। प्रस्तावों को ऑनलाइन भरने में विभाग के किसी अधिकारी कर्मचारी की कोई भूमिका रही ही नहीं।