अबेडकरनगर। जिले का स्वास्थ्य विभाग समय-समय पर भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरता रहा है, लेकिन इन आरोपों पर कार्रवाई कम और कागजी जांच ज्यादा देखने को मिलती है। चाहे मामला जिला अस्पताल का हो या सीएमओ कार्यालय के जिम्मेदारों पर उंगलियां उठती रहीं, पर परिणाम आज तक शून्य ही रहा है। जैसे ही कोई नया मामला सामने आता है, आनन-फानन में जांच समिति बना दी जाती है, लेकिन अधिकतर मामलों में या तो जांच शुरू ही नहीं होती, या फिर रिपोर्ट कभी सार्वजनिक नहीं होती।
सोमवार को जिला अस्पताल के ऑर्थो डिपार्टमेंट में एक मरीज से रॉड निकालने के नाम पर पांच हजार रुपये मांगने का आरोप सामने आया। पीड़ित मुकेश कुमार ने इस बाबत डीएम से भी शिकायत की। ऑडियो वायरल होते ही अस्पताल प्रशासन ने तीन सदस्यीय जांच कमेटी बना दी और तीन दिन में रिपोर्ट मांगी गई। लेकिन हैरानी की बात यह है कि टीम प्रभारी को आदेश मंगलवार को मिले, जिस वजह से पहले दिन जांच शुरू ही नहीं हो सकी। अब सिर्फ दो दिन बाकी हैं।
नवीनीकरण के दौरान रिश्वतखोरी के गंभीर आरोप
जलालपुर क्षेत्र में एक डेंटल क्लीनिक संचालक के भाई ने सीएमओ ऑफिस के लिपिक पर क्लीनिक नवीनीकरण के एवज में रुपये मांगने का आरोप लगाया था। मामला सामने आते ही डीएम अनुपम शुक्ला ने एडीएम डॉ. सदानंद गुप्ता की अध्यक्षता में जांच समिति गठित की थी। इस प्रकरण में डेंटल एसोसिएशन ने सीएमओ और लिपिक के समर्थन में पत्र दे दिया, जबकि कुछ लोग आरोपों की पुष्टि कर रहे हैं। एडीएम का कहना है कि साक्ष्य गोपनीय या सार्वजनिक रूप से दिए जा सकते हैं और साक्ष्य आधारित कार्रवाई की जाएगी।
राज्य महिला आयोग की सदस्य के सामने लगे थे पैसे के आरोप
जिला अस्पताल के महिला विंग में ऑपरेशन के नाम पर पैसे मांगने के आरोप राज्य महिला आयोग की सदस्य चारू चौधरी के सामने उठ चुके हैं। मौजूद तीमारदारों ने जांच की मांग की थी, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसी महीने एडीएम ने बाहर की दवाएं लिखने की शिकायत पर भी अस्पताल पहुंचकर जांच की, पर अब तक परिस्थिति जस की तस है।