जिला उपभोक्ता फोरम ने वाहन दुुर्घटना के एक मामले में बीमा कंपनी की दलील खारिज करते हुए पीड़ित पक्ष को लगभग साढ़े 4 लाख रुपए का भुगतान करने का निर्देश दिया है। बीमा कंपनी का कहना था कि दुर्घटनाग्रस्त कार में 6 सवारियां बैठी थी। इसलिए बीमा का लाभ नहीं दिया जा सकता। घटना में पांच लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 3 वर्ष की एक बच्ची जाह्नवी बच गयी थी। कोर्ट ने जाह्नवी को अलग से सवारी न मानते हुए भुगतान के निर्देश दिए। कहा कि यदि एक माह के अंदर यह रकम न अदा की गई तो कंपनी को 12 प्रतिशत ब्याज दर के हिसाब से भुगतान करना पड़ेगा।
भीटी थानाक्षेत्र के चंदापुर रामबाबा गांव निवासी ओेंकारनाथ तिवारी ने गत 22 जनवरी 2013 को न्यायालय जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम में एक मुकदमा दायर किया। बताया कि उन्होंने बीते दिनों एक कार खरीदी थी, जिसका नेशनल इंश्योरेंश कंपनी से बीमा था। इसकी संपूर्ण बीमित धनराशि 4 लाख 58 हजार 623 रुपए है। 13 अक्टूबर 2011 को उसके परिवार के सदस्य कहीं जा रहे थे। इसी बीच दुर्घटना हो गई, जिसमें जाह्नवी 3 वर्ष को छोड़ अन्य पांच परिवारीजनों की मौत हो गई।
घटना से वाहन भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। बीमा कंपनी से बीमित धनराशि की मांग की गई, तो वह हीलाहवाली कर रही है। परिवादी के अधिकवक्ता संतोष विश्वकर्मा ने बताया कि वाहन मालिक ने मुकदमे में नेशनल इंश्योरेंश कंपनी गोलघाट सिविल लाइंस सुल्तानपुर शाखा प्रबंधक व फैजाबाद के शाखा प्रबंधक को अपना वादी बनाया।