आढ़तों पर किसानों के धान की खरीद को मंजूरी दिए जाने समेत विभिन्न मांगों को लेकर जिले की 60 राइस मिलों में रविवार से बेमियादी हड़ताल शुरू हो गई। राइस मिलरों ने प्रदेश सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया और कहा कि राइस मिलरों के हितों की अनदेखी की जा रही हैै।
उधर राइस मिलरों की हड़ताल के चलते आगामी दिनों में शुरू होने वाली धान की खरीद पर असर पड़ने की आशंका को देख किसान चिंतित हैं। धान बेल्ट के रूप में प्रसिद्ध अंबेडकरनगर जिले के राइस मिलरों ने बड़ा आंदोलन छेड़ दिया है। राइसमिलरों का कहना है कि सरकार किसानों के हित के अनुरूप धान खरीद के बावत निर्णय नहीं ले रही है। राइस मिलों की प्रगति तय करने को लेकर भी उपेक्षा का माहौल है।
वे सब लंबे समय से सरकार से राइसमिल व किसानों के हक की मांग करते चले आ रहे हैं लेकिन लगातार उपेक्षा की जा रही है। राइस मिलरों का यह भी कहना है कि आढ़तों पर धान खरीद को इस वर्ष मंजूरी न दिया जाना किसानों के हित में नहीं है। इससे किसानों का ही नुकसान है। यह अनुमति दी जानी चाहिए। गौरतलब है कि जिले में लगभग 60 राइसमिलें हैं।
इनमें से तमाम मिलें सरकार द्वारा दिए जाने वाले धान की कुटाई कर चावल वापस करती हैं जिन्हें सीएमआर अर्थात कस्टम मिल्ड राइस कहा जाता हैै। धान की बेहतर उत्पादकता को देखते हुए ही जिले में राइसमिलों की लंबी शृंखला है। सरकारी धान को कूटकर चावल वापस करने के साथ ही इन राइसमिलों पर उन धान की भी खपत हो जाती है जो आढ़तियों द्वारा खरीदे जाते हैं।
सरकारी क्रय केंद्रों पर होने वाली मुसीबत से बचने तथा नगद भुगतान पाने के लिए अक्सर किसान अपने धान की बिक्री आढ़तों पर कर देते हैं। आढ़तियों द्वारा संबंधित धान की बिक्री राइसमिलों में कर दी जाती है। अब राइसमिलों में बेमियादी हड़ताल शुरू हो जाने से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं।
कारण यह कि धान की फसल लगभग तैयार होने को है। किसान जियालाल व हुबराज ने कहा कि राइसमिलों की हड़ताल लंबी चली तो निश्चित तौर पर उन सभी को अपनी फसल बेचने में कठिनाई होगी। किसानों ने कहा कि शासन-प्रशासन को इस समस्या का समाधान जल्द से जल्द तय कराना चाहिए। राइसमिलर्स एसोसिएशन के मंडल अध्यक्ष रमेश सेठ ने कहा कि हड़ताल के अलावा कोई चारा नहीं था।
प्रांतीय नेता गोविंद अग्रवाल ने कहा कि किसानों के लिए कमीशन आढ़तिया खरीद खोलने की अनुमति शासन को देनी चाहिए। यह अनुमति नहीं मिली तो किसानों का ही नुकसान होगा। जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी अविनाश ओझा ने बताया कि राइसमिलरों की मांग शासन स्तर से जुड़ी है। जिला स्तर का मामला नहीं है। किसानों के धान की खरीद सरकारी क्रय केंद्रों से संपन्न कराई जाएगी।