अंबेडकरनगर। जिला अस्पताल में हर समय आग लगने का खतरा बना रहता है। कभी किसी प्रकार की अनहोनी होने पर मरीजों व तीमारदारों की जान खतरे में पड़ सकती है। पीजीआई लखनऊ में हुए आग लगने के हादसे के बाद टीम ने यहां आग से बचाव के प्रबंधों का मंगलवार को जब पड़ताल की गई तो यहां बड़ी लापरवाही उजागर हुई। लगभग डेढ़ वर्ष से अस्पताल भवन का आंतरिक वायरिंग का ऑडिट नहीं हुआ है। फायर अलार्म लगा नहीं है तो स्मोक डिटेक्टर भी खराब पड़ा है। एक दर्जन फायर बॉक्स देखरेख के अभाव में निष्प्रयोज्य हो चुके हैं।
पीजीआई लखनऊ के ऑपरेशन कक्ष में सोमवार को लगी भीषण आग की चपेट में आने से दो मरीजों की मौत हो गई थी। वहां आग से निपटने की बदइंतजामी सामने आई। इसे देखते हुए मंगलवार को जिला अस्पताल में आग से निपटने की व्यवस्था की पड़ताल की गई तो कदम-कदम पर लापरवाही व मरीजों की जान से खिलवाड़ की स्थिति नजर आई।
यहां पर आग से बचाव को लेकर व्यवस्थाएं दुरुस्त नहीं मिलीं। आंतरिक वायरिंग का ऑडिट पिछली बार डेढ़ वर्ष पहले 22 जून 2022 को जिला अस्पताल व इसी परिसर स्थित मातृ शिशु विंग में की गई थी। इसके बाद से अब तक अस्पताल प्रशासन ने दोबारा ऑडिट कराने की सुध नहीं ली। नियम के अनुसार प्रत्येक तीन माह में ऑडिट होना चाहिए। फिलहाल ऑडिट की जिम्मेदारी विद्युत सुरक्षा निदेशालय अयोध्या पर है।
इस तरह पसरी है बेफिक्री
अस्पताल परिसर में जगह-जगह लगे एक दर्जन फायर बाॅक्स देखरेख के अभाव में पूरी तरह से कंडम हो चुके हैं। इन्हें नियंत्रित करने वाला कक्ष भी जर्जर हो चुका है। मातृ-शिशु विंग में स्मोक डिटेक्टर व फायर अलार्म तो लगा है लेकिन निष्प्रयोज्य है। मुख्य जिला अस्पताल में तो स्मोक डिटेक्टर व फायर अलार्म लगा ही नहीं है।
स्प्रिंकलर सिस्टम लंबे समय से खराब है। हौजपाइप नदारद है। परिसर में लगभग 30 फायर फाइटर लगे तो हैं लेकिन इनमें से कई एक्सपॉयर हो चुके हैं। ऐसे में कभी आग लगने की घटना हुई तो न फायर अलार्म बजेगा और न ही अस्पताल स्तर से आग बुझाने में मदद मिल पाएगी।
जिम्मेदारों को दिखानी होगी गंभीरता
बेवाना के तीमारदार सुनील कुमार व शहजादपुर के इरफान ने कहा कि जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों व तीमारदारों की सुरक्षा पूरी तरह से ताक पर है। आग से निपटने को लेकर बेहतर व्यवस्था नहीं है। केदारनगर के अरविंद, बसखारी के शीतलाप्रसाद व मीरानपुर के रामजी ने कहा कि ऐसा लगता है कि जिम्मेदारों को पीजीआई जैसी बड़ी आग की घटना का इंतजार है। इसे लेकर उन्हेंं गंभीरता दिखानी होगी।
निदेशालय को भेजा गया पत्र
अग्निशमन उपकरणों को चुस्त-दुरुस्त करने व सुरक्षा ऑडिट के लिए स्वास्थ्य निदेशालय और अन्य संबंधितों को पत्र भेजा गया है। यहां आग से निपटने के बेहतर इंतजाम उपलब्ध हैं। किसी भी मरीज व तीमारदार को कोई दिक्कत नहीं होने दी जाएगी।
- डॉ. ओमप्रकाश, सीएमएस