दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन गुरुवार से प्रारंभ होगा और दोदिनों तक चलेगा। इसके लिए प्रशासन ने संबंधित घाटों पर आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं। विसर्जन मार्ग को लेकर किसी प्रकार का विवाद न उत्पन्न हो इसके लिए गणमान्य लोगों के साथ ही दोनों वर्ग के धार्मिक गुरुओं व अन्य व्यक्तियों से भी पुलिस प्रशासन लगातार संपर्क बनाए हुए है।
पिछले दिनों हुईं कुछ घटनाओं के चलते जिले को प्रदेश के संवेदनशील जिलों में शुमार किया जा चुका है। इसी का नतीजा है कि पंचायत चुनाव के तीन चरण में उच्चाधिकारियों की निगाह लगातार अंबेडकरनगर की तरफ बनी रही। अब त्यौहारों को लेकर भी यही स्थिति है।
उल्लेखनीय है कि लगभग तीन दशक बाद ऐसी स्थिति बनी है कि दुर्गा पूजा पर्व व मोहर्रम एक साथ पड़े हैं। इसी के चलते पुलिस व प्रशासनिक उच्चाधिकारियों की चिंता बढ़ी हुई है। जिले में होने वाले तनाव को रोकने के लिए लगातार शासन की तरफ से जिले के अधिकारियों को दिशा निर्देश दिए जा रहे हैं।
इसी क्रम में स्थानीय अधिकारियों ने कई जगहों पर रात में निकलने वाले मोहर्रम के जुलूस को सिर्फ दिन में निकाले जाने के लिए राजी करने की सफलता प्राप्त कर ली। इससे प्रशासन का सिरदर्द काफी हद तक दूर हुआ, लेकिन प्रतिमा विसर्जन अभी भी चुनौती बना हुआ है।
असल में समूचे जिले में लगभग दो हजार दुर्गा प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। इनका विसर्जन मुख्य तौर पर गुरुवार 22 अक्तूबर व शुक्रवार 23 अक्तूबर को होगा। छिटपुट तौर पर कुछ प्रतिमाएं 30 अक्तूबर को विसर्जित की जाएंगी। अकबरपुर नगर में प्रतिमाओं का विसर्जन 23 अक्तूबर को होगा।
शहरी व ग्रामीण क्षेत्र की 135 प्रतिमाएं तमसा तट पर विसर्जित होंगी। श्रवणक्षेत्र में दोनों दिन मिलाकर 235 प्रतिमाएं विसर्जित की जाएंगी। टांडा में गुरुवार को मुबारकपुर क्षेत्र की प्रतिमाएं काली घाट पर तथा ग्रामीण क्षेत्र की प्रतिमाएं महादेवा घाट पर विसर्जित होंगी। इनकी संख्या लगभग 250 में रहेगी। टांडा नगर व आस पास की 130 प्रतिमाएं शुक्रवार को राजघाट पर विसर्जित होंगी।
सम्मनपुर में 108 प्रतिमाएं गुरुवार को विसर्जित की जाएंगी। जलालपुर, जैतपुर व मालीपुर में 195 प्रतिमाएं गुरुवार को तो इन्हीं क्षेत्रों में 121 प्रतिमाएं शुक्रवार को विसर्जित होंगी। इसके अलावा आलापुर, भीटी, केदारनगर, इल्तिफातगंज, जहांगीरगंज आदि क्षेत्र की प्रतिमाएं भी गुरुवार व शुक्रवार को विसर्जित की जाएंगी। बसखारी व जैतपुर समेत कई अन्य क्षेत्रों की प्रतिमाएं चार दिन बाद विसर्जित होंगी।