फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Ambedkar Nagar News: ठंड से बचना है तो घर से लेकर आएं कंबल

Sun, 15 Dec 2024 12:45 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
विज्ञापन
जिला अस्पताल के वार्ड में भर्ती मरीजों को घर से लाना पड़ा कंबल।
विज्ञापन
अंबेडकरनगर। जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों को ठंड से बचने के लिए घर से कंबल या रजाई लानी पड़ रही है। दरअसल भर्ती मरीजों को जो कंबल मिल रहा, वह इतना पतला है, जिससे ठंड दूर ही नहीं हो सकती। वहीं, अस्पताल स्थित रैन बसेरे का भी बेहतर तरीके से लाभ तीमारदारों को नहीं मिल रहा।
विज्ञापन


जिला अस्पताल में मरीजों व तीमारदारों को समुचित व्यवस्था का दावा तो बढ़-चढ़कर किया जा रहा, लेकिन उसे जमीनी हकीकत देने को लेकर ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा। मौजूदा समय में अलग-अलग वार्ड में भर्ती मरीजों व तीमारदारों का कहना है कि ठंड लगातार बढ़ रही है, लेकिन इससे बचने के लिए मरीजों को बेहतर व्यवस्था नहीं मिल रही।

वार्ड में भर्ती मरीजों का आरोप है कि जो कंबल उन्हें अस्पताल से मिल रहा है, वह अत्यंत पतला है। चादर के समान कंबल से ठंड दूर नहीं होती। ऐसे में घर से कंबल व रजाई मंगवाना पड़ रहा है। जिम्मेदारों से शिकायत भी की गई, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा सका।
विज्ञापन




जिम्मेदार दिखाएं गंभीरता

रामनगर से आए तीमारदार विनय कुमार ने कहा कि उनके चाचा यहां भर्ती हैं। अस्पताल से पतली सी चादर मिली है। ऐसे में ठंड को देखते हुए घर से कंबल लाना पड़ा। अकबरपुर के तीमारदार संजय ने कहा कि उनकी मां को ठंड लगने के चलते उल्टी व बुखार था। उन्हें यहां भर्ती कराया। यहां ठंड से बचने की कोई व्यवस्था नहीं थी। इसलिए घर से रजाई मंगानी पड़ी। उतरेथू के तीमारदार आदर्श ने कहा कि बड़े भाई को यहां भर्ती कराया है। जब पतली सी चादर ओढ़ने को मिली, तो कहा कि इससे तो ठंड नहीं दूर होगी। घर से कंबल लाना पड़ा। कई अन्य मरीजों व तीमारदारों ने जिला अस्पताल में ठंड से बचने का उपाय न होने की शिकायत दर्ज कराई।

अलाव की भी व्यवस्था नहीं

जिला अस्पताल में मिले जहांगीरगंज के राजनाथ व मालीपुर के नीरज ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि दिन तो किसी तरह कट जाता है, लेकिन रात में तेज ठंड पड़ने से मुश्किल हो रही है। अलाव की समुचित व्यवस्था नहीं की गई है। ऐसे में खुद ही अलाव की व्यवस्था कर रहे हैं। कटेहरी के तीमारदार राकेश कुमार व किछौछा के इमरान ने कहा कि रैन बसेरा तो स्थापित है, लेकिन उसका समुचित लाभ नहीं मिल रहा। अक्सर वह बंद ही रहता है। जब इसे लेकर जिम्मेदारों से कहा जाता है, तो ताला खोला जाता है।





बोले अधिकारी

ठंड से बचाव के लिए मरीजों को सुविधाएं दी जा रही हैं। अस्पताल से उन्हें एक कंबल दिया जाता है। रैन बसेरा स्थापित है, तो अलाव की भी व्यवस्था की गई है। -डॉ. ओमप्रकाश, सीएमएस
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें