अंबेडकरनगर। सीबीएसई ने छात्र-छात्राओं की उपस्थिति को लेकर इस बार सख्त रुख अपना लिया है। बोर्ड की टीम अब नियमित रूप से आकस्मिक निरीक्षण करेगी, ताकि स्कूलों में छात्र-छात्राओं की उपस्थिति की जांच की जा सके। सीबीएसई ने स्कूलों से 75 प्रतिशत से कम उपस्थिति वाले छात्र-छात्राओं की सूचना भी मांगी है।
जनपद में सीबीएसई के 30 से अधिक विद्यालय मौजूद हैं। इनमें आठ हजार से अधिक छात्र-छात्राएं इस बार 10वीं और 12वीं की परीक्षा देने के लिए पंजीकृत हैं। हाल ही में बोर्ड ने दिल्ली और राजस्थान के कई स्कूलों में निरीक्षण किया, जिनमें छात्र-छात्राओं की उपस्थिति कम मिली। इसके बाद बोर्ड की ओर से संबंधित स्कूलों को चेतावनी पत्र जारी किए गए। बोर्ड के नियमों के अनुसार 10वीं व 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं देने के लिए विद्यार्थियों की कम से कम 75 प्रतिशत उपस्थिति आवश्यक है। बोर्ड केवल आपातकालीन स्थिति या अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में भागीदारी और अन्य गंभीर कारणों के लिए ही 25 प्रतिशत छूट प्रदान कर सकता है। बशर्ते, आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत किए गए हों। वर्तमान में डमी स्कूलों के मामलों ने बोर्ड की चिंता बढ़ा दी है, जहां छात्र-छात्राओं की अनुपस्थिति के बावजूद हाजिरी लगाई जाती है। छात्र स्कूलों में न आकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे होते हैं। परिणामस्वरूप बोर्ड का रिजल्ट खराब हो जाता है।
सीबीएसई ने स्पष्ट किया है कि निरीक्षण के दौरान छात्र- छात्राओं की अनुपस्थिति का उचित कारण नहीं मिला तो उन्हें 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा में शामिल होने से भी वंचित किया जा सकता है। इसके अलावा, उपस्थिति रिकार्ड में किसी प्रकार की धांधली उजागर होने पर स्कूल की मान्यता भी रद की जा सकती है। अनुपस्थिति की गणना एक जनवरी 2025 तक की जाएगी, और 75 प्रतिशत से कम उपस्थिति वाले विद्यार्थियों की सूचना सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ सात जनवरी तक बोर्ड में जमा करनी होगी।
75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य
सीबीएसई बोर्ड की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की परीक्षा देने के लिए 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य कर दी गई है। निरीक्षण के दौरान कोई विद्यार्थी बिना उचित कारण के अवकाश के दस्तावेजों में अनुपस्थित मिलता है तो उसे परीक्षा में बैठने से रोका भी जा सकता है। -अखिलेश शुक्ल, जिला कोऑडिनेटर सीबीएसई